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शनिवार, 29 जून 2019

जीवन के अध्याय

         जीवन की दौड़ अनंत होने के कारण बंधनों को तोड़ने का काम मनुष्य को मिला.ध्यान से देखने पर धरती उर आकाश दोनों ही तेजी से उड़े जा रहे हैं.इसलिए सदैव हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि मनुष्य का कोई भी एक काम का अंत नहीं होता हैं.मानवीय भावनाओं को तोड़ना असंभव हैं लेकिन तोड़ना ही होगा.तभी हम नया पन स्वीकार कर पाएगे.ढर्रे वाली पुरानी जिंदगी में नवीनता लाने के लिए इससे छुटकारा पाना होगा.जीवन में नयापन नवीन संचारों से भरता हैं.इसलिए निराश भरी जिंदगी को नीति नए आयामों से भरना चाहिए.हम अपनी उबाऊ जिंदगी को पुराने जोंक की तरह नहीं जी सकते,मन कि जमी काई को हटाने के लिए नीति नयेपन के लिए कुछ-न कुछ करते रहना चाहिए.जीवन में नयापन लाकर खुशनुमा जीवन जीने में परिवार का बड़ा ही महत्व होता हैं.इस संबंध में थामस जेफरसन का कथन हैं कि मेरे जीवन के सबसे खुशनुमा पल वे थे जो मैंने अपने परिवार की छांव में बिताए थे.परिवार का जीवन में अहं महत्व होता हैं.इसके बिना सामाजिक अधूरी हैं क्योकि परिवार व्यक्ति कि प्रथम पाठशाला होती हैं.फ्रांसिस बेकन के अनुसार, ‘अच्छे परिवार आलू कि तरह होते हैं,जिंका बेहतरीन हिस्सा नींव में होता हैं.’
          हमारा पूरा जीवन अनुभवों पर टीका होता हैं जितने अधिक हम प्रयोग करते रहते हैं,अनुभवों कि नींव जीवन में उतनी ही मजबूती से होती जाती हैं.इसलिए हमें असमंजस्य कि जिंदगी नहीं व्यतीत करना चाहिए जैसा कि सुभाष चंद्र बॉस का कथन हैं कि जीवन में कोई चीज इतनी हानिकार्क नहीं होती जितना डांवाडोल रहना.कहा गया हैं कि जिंदगी ऐसी जियो जो दूसरों के कम आए और प्रेरक बने.’इस संबंध में इन्दिरा गांधी जी का कथन हैं कि जीवन का महत्व तभी हैं,जब वह किसी महान ध्येय के लिए समर्पित हो.यह समर्पण ज्ञान पूर्ण और न्याय मुक्त हो.व्यक्ति का व्यक्तित्व जन्मजात नहीं होता हैं बल्कि वह अपने कर्मों से सद्व्यवहार से बनता हैं.यह सही हैं व्यक्तित्व विकास के बीज बचपन से मिलते जरूर हैं पर इसका रूप जीवन भर मिलने वाले खाद पानी से सँवरता रहता हैं.खुशमिजाज़ और प्रभावशाली व्यक्तित्व एक दिन कि कमाई नहीं होती बल्कि जीवन भर कि पूंजी होती हैं.हमें बीती बातों को सोचकर उन बातों के लिए दुख नहीं मनाना चाहिए.आज का मोह रखकर आने वाले कल से आसक्ति रखना चाहिए.क्योकि इंसान की सफलता के 85% योगदान उसके मानसिक खिवैये एवं प्रवृति का होता हैं.और केवल 15% योगदान उसके एपटिट्यूड या किताबी ज्ञान या जानकारी का होता हैं.अंदर छिपे व्यक्तित्व को बाहर निकालने के लिए लेडी आगा का कथन हैं कि सोचो,लगातार सोचो कि कैसे तुम अपने भीतर के राजा या रानी को बाहर ला सकते हो कैसे?अपने अंदर के सितारों को आकाश दे सकते हो.जीवन भगवान का दिया तोहफा हैं ,जरूर पर खलील जिबरान के अनुसार, ‘जीवन के दो प्रमुख उपहार सौंदर्य और सती.सौंदर्य को मैंने एक प्रेम करने वाले हृदय में पाया और दूसरे को एक मजदूर के हाथों में.’
   परिस्थितियाँ अनुकूल –प्रतिकूल सदैव विद्यमान रहती हैं इसलिए परिस्थितियों के पक्ष में होने का इंतजार मत कीजिये बल्कि परिस्थितियों को परफेक्ट बनाने कि शुरुआत कीजिये.क्योकि मैक्सवैल माल्ब्ज के अनुसार, ‘अक्सर एक सफल और एक असफल व्यक्ति के बीच का अंतर क्षमता या विचार नहीं होते,बल्कि अपनी योजना को क्रियान्वित करने का साहस,समय बूझ का जोखिम उठाना और कारी करना होता हैं.’ असफलता हमें जीवन में मजबूती से रहना सिखाती हैं कि हताश हो और अच्छी तरह से ईमानदारी से अपनी कमियों को ढूढे जिसके कारण आप असफल हुये हैं.ज़िम्मेदारी से डटे रहो.किसी को भी सफलता पाने के सीधे सरल टेढ़े-मेढ़े रास्ते पता नहीं होते बस,कोशिस हिम्मत से आगे बढ्ने का प्रयास करते हैं.जैसा कि बिल कासवी का कथन हैं, ‘मुझे सफलता का मंत्र नहीं पाता,पर सभी को खुश करने का प्रयास करना ही असफलता का मंत्र हैं.किसी काम को कल पर नहीं छोड़ना चाहिए.हमें अपने आप पर विश्वास करना चाहिए.दुनियांदारी कि बातों को सुनो,उन्हे मनन करो,मतलब कि बाते लेकर बाकी को छोड़ दो क्योकि सभी का कथन हैं, ‘दुनियाँ हमें यह बताकर मूर्ख बनाती हैं कि हमें कल का इंतजार करना चाहिए ,जबकि जीवन का आनंद इसी क्षण में हैं,जिसमें आप जी रहे हैं.’जीवन का रूप कैसा भी हो हमें दूसरों से तुलना करके अपना जीवन नरकीय नहीं बनना चाहिए.भगवान का दिया उफार समझकर उसी को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए.कहते हैं दुनियाँ में लाने का काम जननी ने किया,अपना निर्माण करना खुद का कम होता हैं.वैसे किस्मत की लकीरे कोई नहीं मिटा सकता,इस वाक्य को जीवन मे उतना ही उतारों जब अपने आपको पूर्णयता ईमानदारी के सती निमार्णकारी में लगाया हैं.हमें जीवन का हर दिन एक नई उमंग के साथ जीना चाहिए.कल किसने देखा इसलिए आज ही पूर्णयता आनंदित होकर जीवन का अंतिम दिन मानकर जीना चाहिए.जीवन अनमोल हैं इसे आत्महत्या करके व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए.जैसा कि अज्ञेय जी कहते हैं कि सूर्यास्त का समय के करीब वह जमुना के किनारे एक घाट पर पहुँच गया.अपने आगे उसे चमकते हुये पानी का विस्तार देखकर मन में दिन भर में पहली बार में कुछ ऐसा बोध हुआ कि वह दुनियाँ में आ ही नहीं गया हैं बल्कि उसका उसमें कुछ नाता भी हैं सबसे पहले अपने आप से प्यार करना सीख जाएगी तो दुनियां और दुनियां के लोग स्वयम ही अच्छे लाग्ने लगेगे.इसलिए जीवन मे खुद से प्यार करने के लिए खुद से प्यार करना अति आवश्यक हैं.मिट्टी में मिलकर मिट्टी फिर मिट्टी बन जाती हैं.इसी मिट्टी बदौलत नई-नई खुशियों के काफिले निकलते हैं......जारी हैं   

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