जो कुछ हूँ, सब आपके वजह से हूं. ........ माँ शब्द सुनते ही मन में अजीब सी हलचल होने लगती हैं, मन हिलोरें लेने लगता है।मेरी मां शब्द ऐसी मम...
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Archives for अगस्त 2017
बुधवार, 30 अगस्त 2017
प्रेरणा या अंध भक्ति
मन ही मन बुदबुदाते हुए सब्जी मंडी पहुंच गई।घर में राशन के नाम पर कुछ नहीं बचा था, सोचा कुछ फल से काम चला लूंगी।लेकिन सब्जी मंडी पहुंच कर दे...
सोमवार, 21 अगस्त 2017
जिन्दगी एक जुआँ हैं हमारी जिन्दगी एक जुआँ की तरह हैं जिसमें ताश के पत्तों की तरह जीवन की खुशियाँ बिखर जाती हैं .जब तक जीवन में सुखों का...
शनिवार, 19 अगस्त 2017
“जिंदगी गडित का एक सवाल हैं” हमारी जिंदगी गडित का एक सवाल की तरह होती हैं, जिसमें सम -विषम संख्याओं की तरह उलझनों से भरे सवाल हैं.जीवन...
‘कारनामें फोन के’ फोन की घंटी को ट्रिन... ट्रिन....घनघनाना , डिब्बे के आस-पास सबका जमघट -सा जमजाना. मजाल जिसकी ,बड़ों के सामने छोटें...