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बुधवार, 19 जून 2019

जीवन के अध्याय

        बाधाएँ हमारे जीवन का अभिन्न अंग होती हैं.पहले से ही कुछ निर्धारित नहीं होता हैं.बल्कि बाधाएँ वह मार्ग प्रदान करती हैं जिस पाए चलकर आप एक नयी जीवन की शुरुआत कर सकते हैं.हमारा जीवन संभावनाओं से भरा होता हैं.संभावनाओं की सीमा का पता लगाने का एक मात्र रास्ता हैं कि उनसे आगे बढ़कर असंभव तक पहुंचा जाएँ.जिंदगी कि सबसे बड़ी सच्चाई या त्रासदी यही हैं कि हम बूढ़े बहुत जल्दी हो जाते हैं और बुद्धिमान देर से होते हैं.किस्मत कठोर मेहनत से बनती हैं,क्योकि अच्छी किस्मत की मांग कठोर मेहनत हैं.
              जीवन में सहना ही अटल सती हैं.यहाँ ना आंसुओं का महत्व होता हैं ना कि भावनाओं का.कभी-कभी किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने प्रति भी निर्दयी होना पड़ता हैं,सहना ही गति देता हैं.
           जीवन का महल घंटों,मिनटों,सेकंडों कि ईंटों से बनता हैं.नदियों के साथ जीवन जीने की कला सीखना चाहिए.नदी के स्वभाव को व्यक्ति में लालितव भरा भाव होता हैं,वह अपने चंचल स्वभाव को व्यक्ति के मन में बड़े ही हाव-भाव से विचारों में उतार देती हैं.नदी में बाढ़ आती हैं,तो हमें बाढ़ के साथ-साथ बढ्ने कि कला आणि चाहिए,न कि उफनती बाढ़ में डूबना.उसमें तैरकर विभिन्न पढ़ावों को पार करते हुये अपने जीवन का मकसद तय करना चाहिए.आड़े-टेड़े रास्तों को पार करती हुई,घाटो से गंदगी साफ करती हुई नदी अपना रास्ता बना लेती हैं,उसी तरह मानुषी को जीवन जीने का रास्ता अपनाना चाहिए क्योकि जीवन वही होता हैं जो धारा के साथ चले.यही चलते रहना मानुषी के जीवन का दर्शन बन जाता हैं.प्रकृति का विराटतम रूप अपने में कई अद्भुताओं को समेटे हुये हैं.उसमें ब्रह्मांड की दुनियाँ समाई हुई हैं.खगोलीय गणना अंकित हैं.मानव तो उयसमेन एक बूंद की तरह और उसने अपने आप में आत्मसात करके जीवन शैली अख़्तियार की हैं.जान.एस.केनेडी कहते हैं कि परिवर्तन जीवन का नियम हैं और जो लोग केवल अतीत या वर्तमान में जीते हैं,निश्चित रूप से भविष्य से चूक जाते हैं.
           जीवन यह नहीं हैं कि आप तूफान से कैसे बचते हैं ?यह तो बस इतना हैं कि आप बारिश में कैसे नाचते हैं?हर इंसान में कोई-ना-कोई प्रतिमा होती हैं,लेकिन वो डर कर कदम  नहीं बढ़ा पाता.और इस प्रतिमा को दूसरों की तरह अपने को बनाने में लगा लेता हैं.साहस से आगे बढ़कर वो अपनी एक अलग पहचान बना सकता हैं.क्योकि साहस सिर्फ आगे बढ्ने कि शक्ति नहीं हैं बल्कि शक्ति ना होने पर भी आगे जाने का नाम ही साहस होता हैं.
          हमारे जीवन का दृष्टिकोण हमारी दिनचर्या पर निर्भर करता हैं. किसी व्यक्ति को बार-बार असफलता मिलने पर भी वह शांतभाव से सामना करते हुये धैर्य के साथ आगे बढ़ता जाता हैं.लेकिन कुछ व्यक्ति के जीवन में असफलतायेँ अवसाद घोल देती हैं.चिड़चिड़ापन उसके जीवन में प्रवेश करके हताश कर देता हैं.अवसाद भरा जीवन व्यक्ति में निराशा घोल देता हैं लेकिन आदर्शवादी व्यक्ति अपने आदर्श पर टिके रहते हैं और निराशा,अवसाद,हताशा को अपने पास भटकने भी नहीं देते.क्योकि यथार्थवादी जीवन जीने वाला व्यक्ति वास्तविकता को स्वीकार करके सकारात्म्क सोच रखता हैं. .......जारी हैं 

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