वादों का मकङजाल
धरती पर सत्ता का महासंग्राम
चुनावी रण में गूंजी हुंकार
गिरगिट की तरह बदलती चुनावी रंगत
चढा चुनावी मौसम का बुखार
चुनावी मानसून की दस्तक
दलों पर धुंधले बादल मंडराये
टिकटों की आपाधापी, खरीद फरोख्त में
आलाकमान सब हालाकमान हुये
प्रतिष्ठा की लङाई मुकाबला नजदीकी
गठबंधन की गूंज सियासत जोर पकङती
रोज मंच सजते महफिले नेताओं की सजती
तंज कसते,तोहमत लगा,सूपङा साफ करने की तैयारी
धर्मवाद, जातवाद की राह पकड़,सिद्धांत ताक पर रखते
दमखम जता,जनता का मिजाज जान,खाई पाटते
इंद्रधनुषी घोषणा पत्र,संकल्प पत्र के पहाड़ खङा कर रहे
वादों के मकङजाल में फंसा, अपना उल्लू सीधा कर रहे
गणित गङबङाता जान,गली मोहल्ले की खाक छान रहे
पर जनाधार मिलने की आशंका में सूखकर कांटा हो रहे
मनुहार,चरणवंदन,भोज,सेल्फी लेकर मतदाताओं को रिझाते
मतभुनाने में विचारधारा ने पलटी मारी,कि गिरगिट भी शरमाते
पर मानस मन में लाख टके का सवाल उठता,' ऊंट किस करवट बैठेगा।