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मंगलवार, 26 सितंबर 2017

शिक्षा –       नारी महिमा 
           स्त्रियों की उन्नति का मार्ग उन्नत होने के कारण आने वाला युग महिला जागरण का युग कहलाया.परम्पराओं का ताना-वाना स्त्रियों के चारों और बुना होने के कारण घर परिवार की नींव व नवयुग की दुर्दशा हुई हैं.लेकिन समाज में परिवर्तन हुआ हैं जिसका मुख्य कारण महिलाओं में शिक्षा का प्रसार.महिलाएं शिक्षित हुई हैं,उन्होंने अपनी शक्ति को पहचानकर बुद्धि से काम लेकर अधिक सजग हुई ,क्योंकि उसके ऊपर परिवार व समाज की नींव की सुदृढ़ता बनाएं रखने का उत्तरदायित्व हैं.महिलाओं को अवसर मिलने के कारण अधिकारों के प्रति जागरूक हुई हैं.चेतना व जाग्रति की किरण ने स्त्रियों को जगाया हैं.जगजाहिर यह अटल सत्य हैं कि नारी के बिना पुरुष अस्तित्वविहीन हैं.लेकिन मानसिक संकीर्णता के चलते पुरुष अपने से बराबर का दर्जा देने में अहंकारी हो जाता हैं.मानसिक उलझनों से जूझता हुआ व मुश्किल स्त्री को अपने समकक्ष खड़ा होने देता हैं.महिलाएं शिक्षित होकर विभिन्न विभागों में अपनी पहचान बनाई हैं. भारत देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री वाई फुले ने अपने पति ज्योतिराव फुले, के साथ मिलकर लडकियों के लिए पहला स्कूल सं १८४८ में खोला,पुणे में १८ स्कूल खोले.अन्तरिक्ष में नई इबारत लिखने वाली रूस की वेलेंतीन तेरेस्कोवा अन्तरिक्ष में सफर करने वाली पहली महिला अन्तरिक्ष यात्री बनी सं १९६३,१६ जून को.रूस की ही स्वेतलाना क्वितास्काया दो बार अन्तरिक्ष में जाने वाली दूसरे मिशन में स्पेश में चलने वाली पहली महिला बनी.अन्तरिक्ष पर तीसरी और अमरीकी की पहली महिला सैली राईड सं १९८३ अपने दो मिशन में १४ दिन अन्तरिक्ष पर रह कर आई.शेनों ल्युसिड,१९९६ में अन्तरिक्ष पर १८८ दिन मीर स्पेश स्टेशन पर बिताएं.एलिन कोलिन्स ने १९९५-२००५ तक चार बार अन्तरिक्ष में सफर पर गई.स्पेश शटल में किसी फ्लाईट को कमांड से करने वाली पहली महिला बनी.पेगी बहित्सन स्पेस स्टेशन की पहली महिला कमांडर बनी जिन्होंने सबसे ज्यादा ३७६ दिन,१७ घंटे और २२ मिनट अन्तरिक्ष में गुजारे.
                     कम्प्यूटर सीन्स में इंजीनियर बनी कृति फौजदार इसरों के कर्नाटक सेंटर में इंजीनियर हैं,जो सेतेलाएत खराबी का काम देखती हैं. अब्दुल कलाम अवार्डपाने वाली प्रथम महिला ऍन.क्लार मठी जिन्होंने स्पेस सीन्स में उल्लेखनीय यिग्दान दिया.इसके अलावा रिमोट सेंसिंग सैटेलाईट युक्त मिशन की प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनने वाली प्रथम महिला हैं.आकाशीय रहस्यों को बचपन से जानने की इच्छुक ऋतु करिधाल, डिप्टी ओपरेशन डायरेक्टर मार्स ऑर्बिटर मिशन,इसरो में मॉम और अन्यप्रोजेक्ट का हिस्सा हैं.इसरो में बीस सालो में १४ अलग-अलग मिशन में योगदान देने वाली नन्दिनी हरिनाथ का मानना हैं कि महिलाएं करियर और परिवार में आसान से संतुलन बना सकती हैं.माँ मैथ्स टीचर और इंजीनियर पिता से प्रेरणा लेकर नन्दिनी साएंटिस्ट बनी.इसरो में नन्दिनी, , डिप्टी ओपरेशन डायरेक्टर मार्स ऑर्बिटर मिशन में कार्यरत हैं.कोलकाता की मोमिता दत्ता,प्रोजेक्ट मैनेजर,मार्श ओर्बीतर मिशन ने डबलिन में पी-एच.डीछोड़ इसरो में कार्य किया.मॉम के लिए कार्य कर चुकी मोमिता कहती हैं कि स्पेस रिसर्च हमारे लिए बच्चे की परवरिश जैसा हैं.
                  पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपना प्रेरणा अत्रोत मानने वाली टैली थॉमस,वैज्ञानिक देश की प्रथम महिला हैं जिनकी अगुवाई में मिशाल बनती हैं.हायपरसोंनिक स्पेस क्राफ्ट पर काम कर रही हैं जो मन्ग्ल्यान तक यात्रा करेगा.टेल्को मोटर्स में प्रथम महिला इंजीनियर चुनी जाने वाली सुधा मूर्ति की बिजनेस के साथ लेखन में भी थी.टीचर के साथ ट्रेवलिंग का शौक रखने वाली सुधा ने सकारी स्कूलों में कम्प्यूटर और लायब्रेरी की सुविधा लाने का प्रथम प्रयास किया.उनका कहना हैं कि-अँधेरे में रहने से अच्छा हैं किआप एक मोमबत्ती जला ले.इसो फलसफे के साथ जिन्दगी जीती हैं.
                 भारत में सं १९२१ में महिलाओं को वकालत करने की अनुमति मिलने पर पहली वकील कानेर्लिशा सोराबजी बनी.पर्दे में रहने वाली महिलाओं को इन्साफ दिलाया.निक्की हेली उर्फ़ निकरत रन्घावाकी माँ के देश छोड़ने से २१ साल पहले भारत में महिला जज बन चुकी थी.भारत में जज बनने वाली पहली महिला अन्ना चांदी सं १९४८ में तथा केरल हाईकोर्ट में सं १९५९ में जज बनी.सं १९८९ में भारत में जस्टिस फातिमा बीबी सुप्रीम कोर्ट की पहली जज नियुक्ति हुई.फ्रांस में जन्मी अमेरिका में वकील रही क्रिस्टीन लेगादे आई ऍम एफ की पहली महिला प्रमुख रही.यूरोप के कर्ज संकट से निपटने वाली मार्केल के बाद दूसरी महिला हैं.सं २०१२ में एम्बईव की स्थापना करने वाली अदिति अवस्थी,संस्थापक और सी ई ओ एकेडमिक गईदेंस का कार्य इनकी कम्पनी करती हैं.असफलता से निकली रह ने अदिति की कम्पनी तीन साल में २५ करोड़ की कम्पनी बन गई.२८ वर्षीया अपराजिता ने सं २०१२ में सिक्किम की पहली आई पि एस बनी.छोटे से कार्यकाल में कई ट्राफी ,मेडल जीतने की क्षमता रखने वाली अपराजिता प्रशासन में नी उम्मीद और अलग पहचान हैं.इन्होने वो कर दिखाया,जो उनसे पहले किसी महिला ने नहीं किया.दिसम्बर २००९ में एक यूनिक रिटेल स्टोर टप्पू की दूकानकी संस्थापक स्नेहा राय्सेनी ने ख़ास चीजों के लिए ये जगह बनाई.२४ वर्षीया सलोनी ने महिलाओं इ साथ देश का पहला ग्रामीण बीपीओ बनाया.२००७ में देशी करू लांच हुआ जिसमे ४०० महिलाये हैं.सं १९९२ में बने सबसे ज्यादा कारोबार करने वाले दुनियां के तीसरे सबसे बड़े स्टाक एक्सचेंज संभालने वाली चित्रा राम क्रष्ण प्रथम महिला बनी,वे एन एस ई की प्रमुख कार्यकारी और प्रबन्धक निदेशक हैं.भारत के बीमा क्षेत्र की सबसे पुरानी सनसथा एक आई सी की प्रथम महिला एम डीऊषा सांगवान बनी.देश की तीसरी सबसे बड़ी निजी बैंक एक्सचेंज की एम डीशिखा शर्मा सं २००९ में बनी.पेप्सिको की चेयरपर्सन व सी ई ओ इंदिरा नूयी बनी.
                     बौलीवुड की सबसे कम उम्र की स्टंट आर्टिस्ट २८ वर्षीया सनोबर का कहना हैं कि एक अच्छे स्टंट के लिए विजुआईलेजेशन सबसे जरूरी हैं.मुम्बई की होमी व्यारावाला ने फोटोग्राफी का पेशा अपनाकर भारत की प्रथम महिला फोटोग्राफर होने का श्रेय हासिल किया.द्वितीय विश्व युद्ध १९४२ के जीवंत द्रश्यों को कैमरे में उतरकर काफी लोकप्रिय हुई.मॉडलिंग के साथ फैशन शो की कोरियोग्राफी का काम शुरू करने वाली जिनी नौरोजी एक मात्र महिला फोटोग्राफर बनी.जीनी ने विशुद्ध पेशेवर रुख अपनाकर इसे ग्लैमरस बना दिया.प्रिनाम्स्व्रूप अच्छे घरानों की सुशिक्षित लडकिया इस क्षेत्र में आने लगी.भारतीय फैशन जगत की सम्राज्ञी कही जाने वाली ऋतु कुमार ने इस क्षेत्र में गरिमा और सम्मान हासिल की.मिस वर्ल्ड चुनी गई युक्ता मुखर्जी के सौन्दर्य को एक नई परिभाषा देने में ऋतु कुमार की डिजायनिंग की अहम भूमिका हैं.न्रत्य क्षेत्र में सभी महिलाओं की लिए वर्जित के समय कला क्षेत्र की स्थापना करने वाली नर्तकी रूकमनी देवी अरूंडेल नवीनता और पुरातनता की मिली-जुली धारा हैं.वीना और बांसुरी को खोई प्रतिष्ठता दिलाने वाली रूकमनी देवी क्वीन विक्टोरिया मेडल से सम्मानित हैं.टिकमगढ़ जिले के राजा वीरसिंह द्वारा अपनी खोई बहिन का करार सुविख्यात ध्रुपद की गायिका असगरी वाई को दिया.
                 मुम्बई की लोकल ट्रेन की कमान संभालने वाली भारत की नहीं बल्कि एशिया की पहली यात्री रेलगाड़ी की चालक सुरेखा यादब बनी.साथ ही लेडिज सोशल ट्रेन चलाने वाली पहली महिला हैं,यात्री महिलाओं के प्रति छेड़छाड़ ईवटीजिंग को नजर रखने वुमन ओनली ट्रेन चलाने का सुझाव दिया.भारतीय रेलवे की अकेली महिला मशीनिस्ट शिवानी ट्रेन के पहिये की डॉक्टर के नाम से विख्यात हैं.१२ साल तक कोयले तोड़ने वाली जहाँ केवल पुरुष ही तोड़ते थे.मेहनत के बल पर अपनी बेहतरीन पहचान बनाई.टैक्सी ड्राईवर यूनियन से जुडी भैरवी का कहना हैं कि’उनके लिए निजी जीवन से ज्यादा जरूरी हैं,दूसरे व्यक्ति की स्वतन्त्रता को बनाएं रखने का प्रयास करना.एशिया की पहली ट्रकड्राईवर पार्वती आर्य के अनुसार ‘उन्हें ड्राइविंग सीखने में इतनी दिक्कत नहीं आई,जितनी किआरटीओ से हेवी व्हीकल चलाने का लायसेंस लेने में आई.देश की महिला ट्रेन ड्राईवर सुरेखा यादव ने सं १९८९ में प्रथम बार असिस्टेंट गुड्स ट्रेन पदके लिए आवेदन किया और सफल रही.ट्रक के टायरों को पीठ पर पुश अप्स लगाती२१ वर्षीया गुरप्रीत कौर जिनके इन्स्टा ग्राम पर २१ हजार से ज्यादा फौलो अर्स सोशल मीडिया पर अपने वीडियो अपलोड कर महिलाओं को मोटिवेट करती हैं.ध्वनी की गति को पीछे छोड़ने वाली पहली महिला पायलट जैकलिन कोच्र्ण ने १८ मई ,१९५३ को केलिफोर्निया में कनादायर एफ -८६ जेट को ६५२.३३७ मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ाया.        जारी हैं.......................










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