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सोमवार, 28 मई 2018

नारीमन

बचनबद्धता ......




अर्थ पर काबू पा लिया,
पर आंसू अभी चुके नही,
कल तक जो शक्ति स्वरूपा थी,
आज वो अबला ,अशक्तता कैसे बन गई????
कल तक सहने वाली,आज भी संघर्षरत हैं,
अभी आंसुओं का दौर थमा नही,
दमन की कथाएं,पीडिता के रूप में विद्यमान हैं,
गुपचुप दुखी स्त्री का नारीमन प्रतिबद्ध हैं-
खूंटों से बंधी परम्पराओं की जंजीरों को तोड़ना हैं,



औरत तुझे सपनों की हकीकत का परचम लहराना 
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