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मंगलवार, 26 जून 2018

प्रेम

प्रेम क्या है?????
ईश्वर का दिया वरदान
मूर्त अमूर्त में होता विद्यमान
कोमल, निर्मल, लचीला भाव
लिपिबद्ध नहीं शब्दों से
जिसमें अनन्त गहराई समायी।
प्रेम सनातन है
बडा नाजुक शब्द है
शाश्वत, निस्वार्थ,
निरन्तरता का नाम है
सरल, सहज भरा मार्ग
मायावी दुनियां से लेना देना नहीं
अहंकार, कपट से वास्ता नहीं
क्योंकि प्रेम अहसास हैं
जीने की इच्छा है
दुनियां का सबसे दुरूह शब्द
ये हमें अधिकार से नहीं
सहजता से होती प्राप्ति
प्रेमहीन वर्षा से
नैतिकता शुष्क होती
नीरसता जीवन में आती
इसमें रिएक्शन की प्रक्रिया नहीं
गिरने गिराने में नहीं
समर्पण का दूसरा नाम है प्रेम
मधुरमयी भावनाओं का सागर
रिश्तों की जीवटता बनाता
जीवन का रसास्वादन करता
प्रेम अहसास हैं
जीने की इच्छा है
कब्जा नहीं, प्रशंसा का नाम है
प्रेममयी सुगंध बिखेरता
अपने आप से
मिलवाने की डगर
भाव परिवर्तित होते
पर खुशबू नहीं बदलती
शब्दों की पोटली नहीं बनती
क्योंकि प्रेम उडान हैं. ....
प्रकृति का नायाब तोहफा
जो कण- कण में समाया
उसके अहसास भर से
वातावरण उल्लासमय हो जाता
ताजगी कुछ नया करने का संदेश देती
नवकलिया खिलने को आतुर होती
ऋतुएं, दिनरात, हवाऐं
नया आयाम प्रस्तुत करते
भोर की प्रथम किरणें
झरोखे से झांकती
रात चांदनी निराली
रजत छटा बिखेरती
जन्नत का रास्ता दिखाता
पथ दर पथ भ्रमण करता
आजादी से आन्नद में बहता
क्योंकि प्रेम है. ...
अनन्त अविरल प्रेममयी धारा।
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