वरखा बहार आई. .................. घुमड़-घुमड़ बदरा छाये, चम-चम चमकी बिजुरियां,छाई घनघोर काली घटाएं, घरड-घरड मेघा बरसे, लगी सावन की ...
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गुरुवार, 28 जून 2018
मंगलवार, 26 जून 2018
प्रेम
प्रेम क्या है????? ईश्वर का दिया वरदान मूर्त अमूर्त में होता विद्यमान कोमल, निर्मल, लचीला भाव लिपिबद्ध नहीं शब्दों से जिसमें अनन्त गहर...
शनिवार, 23 जून 2018
मन का भंवर
अकस्मात मीनू के जीवन में कैसी दुविधा आन पड़ी????जीवन में अजीव सा सन्नाटा छा गया.मीनू ने जेठ-जिठानी के कहने पर ही उनकी झोली में खुशिया डाल...
गुरुवार, 21 जून 2018
योग दिवस
व्यस्त जीवन शैली में योग को अंग बनाईये, स्पर्धा भरे माहौल में चरम संतोष पाईये, निराशा ढकेल,सकारात्मक सोच का संचार कराता, उत्साह का स...
सोमवार, 18 जून 2018
असमंजस
आधुनिकता की दौड़ में डगमगाती.... संक्रमण के दौर से गुजरती... मंझधार में फंसी. ... निस्सार जीवन में जर्जर पीत पर्ण सा बिखरा उजडा मन एक...
रविवार, 17 जून 2018
पितृदिवस पर
“पिता हमारे वट वृक्ष समान” किसी ने सही ही कहा हैं कि ‘पिता न तो वह लंगर होता हैं जो तट पर बांधे रखे, न तो लहर जो दूर तक ले जाएँ. पि...
बुधवार, 6 जून 2018
भविष्य के जनक.....[कविता]
"भविष्य के जनक" जल्दी चलो माँ,जल्दी चलो बावा, देर होती हैं,चलो ना,बुआ-चाचा, बन ठनकर हंसते-मुस्कराते जाते, परीक्षा...