मजदूर दिवस
चिथड़े कपड़े ,टूटी चप्पल ,पेट में नहीं एक निवाला,
बीवी बच्चों की भूख की आग को मिटाने की खातिर
तपती दुपहरी में तरबतर, पसीने से कोल्हू के बैल की तरह
कद काठी उसकी मजबूत ,मेहनत उसकी लाठी
खून पसीने से भूमि संचित करता, माटी को स्वर्ण बनाता
अपने दम पर जीने वाला मालिक है वह खुद का,
कंधो पर गरीबी का वोझ ढोता, ख्वाईस आसमान छूने की,
फुटपाथ पर सोता वो,सपनों की दुनिया बुनता,
अमीरों की खुशियों की नींव में अनमोल योगदान है उसका,
रौनक रईसों की बढ़ाने की धुन में, खबर नहीं है मजदूर दिवस की,
रोजमर्रा की तरह ही वो, इस दिन भी मजदूरी करता,
प्रण करें अपने आप से हम सब, मजदूरी को मजबूरी न बनने दें,
आओ मिलकर, सच्ची, निस्वार्थ भावना का उत्सव मनाने.
चिथड़े कपड़े ,टूटी चप्पल ,पेट में नहीं एक निवाला,
बीवी बच्चों की भूख की आग को मिटाने की खातिर
तपती दुपहरी में तरबतर, पसीने से कोल्हू के बैल की तरह
कद काठी उसकी मजबूत ,मेहनत उसकी लाठी
खून पसीने से भूमि संचित करता, माटी को स्वर्ण बनाता
अपने दम पर जीने वाला मालिक है वह खुद का,
कंधो पर गरीबी का वोझ ढोता, ख्वाईस आसमान छूने की,
फुटपाथ पर सोता वो,सपनों की दुनिया बुनता,
अमीरों की खुशियों की नींव में अनमोल योगदान है उसका,
रौनक रईसों की बढ़ाने की धुन में, खबर नहीं है मजदूर दिवस की,
रोजमर्रा की तरह ही वो, इस दिन भी मजदूरी करता,
प्रण करें अपने आप से हम सब, मजदूरी को मजबूरी न बनने दें,
आओ मिलकर, सच्ची, निस्वार्थ भावना का उत्सव मनाने.