जिन्दगी क्या????एक हलवाई की दूकान...... इस मायावी दुनिया में भाँती -भांति के लोग, सबकी अपनी जिन्दगी,कोई अदरक तो कोई सोंठ, किसी की जगह ...
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सोमवार, 21 मई 2018
गुरुवार, 17 मई 2018
मुंह अँधेरे ही भजन की जगह,फोन की घंटी घनघना उठी, घंटी सुन फुर्ती आ गई,नही तो,उठाने वाले की शामत आ गई, ड्राईंग रूम की शोभा बढाने वाला,...
मंगलवार, 15 मई 2018
हमारा परिवार छोटा-सा ,साधारण -सा मध्यमवर्गीय हमारा परिवार, अपनेपन की मिठास घोलता,खुशहाल परिवार का आधार, परिवार के...
रविवार, 13 मई 2018
“ ऐसा भी इजहार: माँ – नानी का ” अनमोल रिश्तों को जोड़ने वाला शब्द ‘ माँ ’ खत हो या फोन ,बच्चों की ...
मंगलवार, 8 मई 2018
मजदूर दिवस चिथड़े कपड़े ,टूटी चप्पल ,पेट में नहीं एक निवाला, बीवी बच्चों की भूख की आग को मिटाने की खातिर तपती दुपहरी में ...
बुधवार, 25 अप्रैल 2018
शांत चेहरे की अपनी होती एक कहानी............ शांत चेहरे पर होती अपनी एक कहानी, पर दिल के अंदर होते जज्बातों के तूफान, अंदर...
शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018
क्यों अनजान रखा,उन काले अक्षरों से........?????? तू..तो माँ...थी..... तेरे लिए क्या..बेटा,क्या...बेटी ..... तेरी ममता तो बिना भेदभा...