वादों का मकङजाल धरती पर सत्ता का महासंग्राम चुनावी रण में गूंजी हुंकार गिरगिट की तरह बदलती चुनावी रंगत चढा चुनावी मौसम का बुखार चु...
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सोमवार, 27 मई 2019
रविवार, 23 सितंबर 2018
वो भी क्या दिन थे .......
वो भी क्या दिन थे .... बचपन के वो दिनअसल जिंदगी जिया करते थे कल की चिंता छोड़ आज में जिया करते थे ईर्ष्या,द्वेष से परे,पाक ...
गुरुवार, 9 अगस्त 2018
मैं कठपुतली नहीं.........
मैं कठपुतली नहीं............ मक बनी हाड़मांस की कठपुतली नहीं गर्वीले रॉब वाली आज की नारी हूँ पलक झपकत...
नारी अंतर्मन
उड़ान बहुत जी ली,अब उसे वो सब गवारा नहीं, बीता वो त्रासदी युग,बंदिशे ढीली पड़ी सुख जागा मन में साबित...
रविवार, 5 अगस्त 2018
राष्ट्र कवि गुप्तजी - दो शब्द
राषटर् कवि मानस भवन में आरय़जन जिसकी उतारे आरती। भगवान भारतव्रष में गूंजें हमारी भारती।। हिंदी साहित्य के राष्ट्र कवि पद...
शनिवार, 4 अगस्त 2018
उम्मीदों की मशाल
रामू की माँ तो अपने पति के शव पर पछाड़ खाकर गिरी जा रही थी.रामू कभी अपने छोटे भाई बहिन को संभाल रहा था ,तो कभी अपनी माँ को.अचानक पिता के चल...
बुधवार, 1 अगस्त 2018
गुरु महिमा
क्षण-प्रतिक्षण,जिंदगी सीखने का नाम सबक जरूरी नहीं,गुरु ही सिखाए जिससे शिक्षा मिले वही गुरु कहलाये जीवंत पर्यन्त गुरुओं से रहता सर...