नारी महिमा.......... महिलाओं को अपने हक के लिए लड़ने के लिए अधिकार तो दिए गये हैं लेकिन उन्हें
अपने आप को सशक्तिकरण के लिए अधिकारों व कानून की जानकारी होना अति आवश्यक
हैं.कानून की अनभिज्ञता के कारण वो अपने प्रति अन्याय के खिलाफ नहीं लड़
पाती.इंडियन पीनल कोड के तहत महिलाओं के लिए कई कानून बनाये हैं.सेक्सन २९४ में
सार्वजनिक रूप से यदि कोई अभद्र भाषा बोले या आपत्तिजनक इशारा करे तो इसकी शिकायत
पुलिश या मजिस्ट्रेट से करने पर अपराधी को तीन महीने की सजा या जुर्माना दोनों ही
हो सकते हैं.शादी के सात वर्ष के अंदर महिला की अस्वाभाविक तरीके से हुई मौत का
कारण पति या उनके रिश्तेदारों द्वारा पीड़ित करता हैं.इसके लिए सजा सात वर्ष से
लेकर आजीवन कारावास तक हो सकता हैं.पत्नी को अपने पति,बच्चों को अपने माता-पिता
से,अभिभावकों से मेंटिनेंस का अधिकार आईपीएस की धारा१२५,सेक्सन २०० के तहत हैं,ऐसा
न करने पर अदालत निर्णय आने के बाद एक महीने से लेकर पेमेंट न होने तक की सजा हो
सकती हैं.महिला की मर्जी के बिना गर्भपात न कराने का अधिकार धारा ३१२ से ३१५ में
प्राप्त हैं.ऐसा न होने पर अपराधी को ३ महीने से ७ वेश तक की सजा हो सकती हैं.यदि
इस वजह से महिला की मौत होती हैं तो उसे आजीवन कारावास हो सकता हैं.गिरवी रखे
आभूषणों को न लौटाने पर धारा ४०६ के तहत सजा तीन साल तक का प्रावधान हैं.इसे अमानत
में खयानत कहते हैं.
गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017
कोई
पुरुष किसी महिला को शादी का झासा देकर शारीरिक शोषण करता हैं तो शोषित महिला धरा
४९३ के तहत शिकायत कर सकती हैं.अपराध साबित होने पर तीन साल या इससे अधिक की सजा
ही सकती हैं.धारा ४९७ के तहत शादीशुदा महिला के साथ कोई पुरुष उसके पति की इजाजत
के बिना शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना सकता हैं.ऐसा न होने पर पति की शिकायत पर अपराधी
को तीन साल या इससे अधिक की सजा हो सकती हैं.महिला के साथ क्रूरता होने पर धारा
४९८ एके तहत महिला किसी रक्त सम्बन्धी एडॉप्शन या शादी से जुड़ा व्यक्ति शिकायत कर
सकता हैं.शिकायत साबित होने पर सजा तीन साल तक की हो सकती हैं.धारा ४९९ के अंतर्गत
किसी व्यक्ति की सार्वजनिक रूप से उसकी
प्रतिष्ठा को हानि पहुचाने पर शिकायत करने पर अपराधी को दो साल तक की सजा और
जुर्माना हो एकता हैं.महिला की मर्यादा को नुक्सान होने पर धारा ५०९ के तहत शिकायत
करने पर सजा एक साल तक होगी इस सजा का काल मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा दिया हैं.कोड
ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर में सेक्सन १५६[३] के तहत अगर पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज न
करने पर रिपोर्ट सिर्फ डीडीआर तक रखी जाती हैं,तो ऐसी स्थिति में सादे कागज पर एस
डीएम को आवेदन देने पर वो पुलिस को एफ आई आर दर्ज करने पर निर्देश दे सकते
हैं.तत्पश्चात मजिस्ट्रेट द्वारा पुलिस अधिकारी से रिपोर्ट पर जबाव-तलब कर
कार्यवाही को आगे बड़ाया जाता हैं.सेक्सन २०० के अंतर्गत किसी भी आपराधिक सिविल आदि
मुकदमे में सीधे मजिस्ट्रेट से शिकायत दे सकते हैं.ऐसा होने के बाद जांच
शिकायतकर्ता के इलाके से सम्बन्धित मजिस्ट्रेट या पुलिस करेगी.तत्पश्चात
मजिस्ट्रेट द्वारा स्टेटमेंट रिकार्ड करने पर वह अपने स्तर पर मामले की जांच करेगी
व इसके अलावा जांच के लिए पुलिस अधिकारी को नियुक्त किया जाता हैं. जारी हैं......................
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