' पंख फैला, आसमान को लांघने को बेताब ' उनींदी सी सुबह, सूखे पत्ते सा जर्जर तरु, रात ढली, सुबह का करे स्वागत! विशाल गगन तल...
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गुरुवार, 14 सितंबर 2017
“ निज भाषा उन्नति अहे,सब उन्नति को मूल| बिन निज भाषा ज्ञान के,मिटत न हिये को सूल|| ” हमारी सामजिक – राजनीतिक शक्ति का आधार ,जन-जन ...
पॉपुलेशन कंट्रोल का प्रचार देख, पांच साल की बच्ची मां- बापू से पूछती- ये क्या होता है? ??? माँ समझाते हुए कहती हैं- जिस परिवार में होत...
"भविष्य के जनक" जल्दी चलो माँ,जल्दी चलो बावा, देर होती हैं,चलो ना,बुआ-चाचा, बन ठनकर हंसते-मुस्कराते जाते, परीक...
'भावी निर्माता अपना भविष्य बुनता' अंधेरे किसी कोने मे ,शांत चित्त, एकाग्र हो, बैठा है ,जाने किस उधेड बुन में, लाच...
बुधवार, 13 सितंबर 2017
हमारा रिश्ता तो बिना किसी लेन देन के चलने वाला असीम रिश्ता था।बाहरी दिखावे से परे, आन्तरिक सुन्दरता, सादगी और आत्मीयता का प्रतीक था। प्रिय...
शनिवार, 9 सितंबर 2017
दो जून रोटी दो जून रोटी है तो यह पांच अक्षर का शब्द ,लेकिन मानव जीवन में कितना महत्व रखता हैं यह तो मानव ही जानता हें.यह शब्द उसके अस्त...