हमारा
रिश्ता तो बिना किसी लेन देन के चलने वाला असीम रिश्ता था।बाहरी दिखावे से परे,
आन्तरिक सुन्दरता, सादगी और आत्मीयता का प्रतीक था।
प्रिय सहेली बेबी,
बाल सखी, उस दिन रास्ते में हमारा आमना सामना हुआ, तो हमने एक दूसरे से अंजानो की तरह न चाहते हुए भी मुंह फेर लिया।घर आकर बहुत रोई, बहुत ही बुरा लगा।एक जरा सी गलत फहमी ने बचपन की दोस्ती पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया,।जिस दोस्ती की सभी मिसाल देते थे, जिस दोस्ती की खातिर हम दूसरों से भिड जाते थे।कम से कम एक बार तो बैठकर गलत फहमी दूर करने की कोशिश की होती, लेकिन ऐसा नहीं कर सके।
सुना है बचपन के दोस्त कई मायनों में खास होते हैं।हमारा रिश्ता तो बिना किसी लेन देन के चलने वाला असीम रिश्ता था।बाहरी दिखावे से परे, आन्तरिक सुन्दरता, सादगी और आत्मीयता का प्रतीक था।समय के साथ हमारी दोस्ती पारस्परिक विश्वास और समझ के कारण गहरी होती गई।हमारी दोस्ती स्वार्थ हीन थी, अनमोल तोहफा थी, हम तो एक दूसरे के साथ विचार, सोच, भावनाओं को साझा किया करते थे, हमारी दोस्ती में सच्चाई थी।तुम मेरे जीवन की खुशी थी, जमीन का खजाना थी और मनुष्य के रूप में नेक फरिश्ता थी, जो निराशा, अवसाद और हताश क्षणों में मानसिक शांति देती थी।
याद है एक बार हमारी दोस्ती में क्षणिक समय के लिए दरार आ गई थी और हमने समय रहते सुलह करके, कभी दोस्ती न तोडऩे का वादा किया था।शायद तुम्हारे जहन से किया वादा विस्मृत हो गया है।तुमसे मिलने का, ढेरों बातें करने का बहुत ही मन करता है, पर कैसे. .. हम एक दूसरे से इतनी दूर पहुंच गए हैं कि मिलना तो बहुत दूर की बात है। कोई आपस का परिचित मिल जाता है तो तसल्ली कर लेते हैं।बस, तुमसे गुजारिश है इतनी कि अगर तुम फरियाद को पढकर, आपसी गिले शिकवे समय रहते दूर कर लो।क्योंकि तुमने हमेशा हमारे अशांत जीवन में द्वंद्व और उलझनों के बीच एक सच्चे दोस्त की भूमिका निर्वाह की है, इसीलिए आज भी मैं तुमसे यही उम्मीद भी करती हूँ।
इसी उम्मीद में,
तुम्हारी बाल सखी
बबली
प्रिय सहेली बेबी,
बाल सखी, उस दिन रास्ते में हमारा आमना सामना हुआ, तो हमने एक दूसरे से अंजानो की तरह न चाहते हुए भी मुंह फेर लिया।घर आकर बहुत रोई, बहुत ही बुरा लगा।एक जरा सी गलत फहमी ने बचपन की दोस्ती पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया,।जिस दोस्ती की सभी मिसाल देते थे, जिस दोस्ती की खातिर हम दूसरों से भिड जाते थे।कम से कम एक बार तो बैठकर गलत फहमी दूर करने की कोशिश की होती, लेकिन ऐसा नहीं कर सके।
सुना है बचपन के दोस्त कई मायनों में खास होते हैं।हमारा रिश्ता तो बिना किसी लेन देन के चलने वाला असीम रिश्ता था।बाहरी दिखावे से परे, आन्तरिक सुन्दरता, सादगी और आत्मीयता का प्रतीक था।समय के साथ हमारी दोस्ती पारस्परिक विश्वास और समझ के कारण गहरी होती गई।हमारी दोस्ती स्वार्थ हीन थी, अनमोल तोहफा थी, हम तो एक दूसरे के साथ विचार, सोच, भावनाओं को साझा किया करते थे, हमारी दोस्ती में सच्चाई थी।तुम मेरे जीवन की खुशी थी, जमीन का खजाना थी और मनुष्य के रूप में नेक फरिश्ता थी, जो निराशा, अवसाद और हताश क्षणों में मानसिक शांति देती थी।
याद है एक बार हमारी दोस्ती में क्षणिक समय के लिए दरार आ गई थी और हमने समय रहते सुलह करके, कभी दोस्ती न तोडऩे का वादा किया था।शायद तुम्हारे जहन से किया वादा विस्मृत हो गया है।तुमसे मिलने का, ढेरों बातें करने का बहुत ही मन करता है, पर कैसे. .. हम एक दूसरे से इतनी दूर पहुंच गए हैं कि मिलना तो बहुत दूर की बात है। कोई आपस का परिचित मिल जाता है तो तसल्ली कर लेते हैं।बस, तुमसे गुजारिश है इतनी कि अगर तुम फरियाद को पढकर, आपसी गिले शिकवे समय रहते दूर कर लो।क्योंकि तुमने हमेशा हमारे अशांत जीवन में द्वंद्व और उलझनों के बीच एक सच्चे दोस्त की भूमिका निर्वाह की है, इसीलिए आज भी मैं तुमसे यही उम्मीद भी करती हूँ।
इसी उम्मीद में,
तुम्हारी बाल सखी
बबली