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सोमवार, 18 सितंबर 2017

बदलता नजरियाँ –          नारी महिमा ..........
              वर्तमान में महिलाओं की सरल,सहज पथों से सफर करती जिन्दगी ने अनेकानेक राहें,पर चलने का मौक़ा दिया हैं.तेज रफ्तार से भागती जिन्दगी का हिस्सा बंका उनकी कमान सम्भाली हैं और बतला दिया हैं कि हालात ही फैसले करने को मजबूर नहीं करते बल्कि वैसे भी वह निर्णय टी कर सकती हैं;आत्मविश्वास से भरी स्त्री ने पग-पग बदकर अपने यकीन को कामयाबी दिलाए हैं.जिम्मेदारी तो पहले से ही थी लेकिन अब दोहरी जिम्मेदारी को बखूबी निभाती हैं और पुरुष वर्ग से अधिक दक्षता हासिल कर अपना स्थान देने को मजबूर करती हैं.कमान हाथ में आते ही उसकी उदासीनता कोसो दूर भागती नजर  अति हैं.अब तो निराशा का दामन थामकर बैठने वालों में नहीं हैं उसने अपने हाव-भाव व्यक्त विचारों से साबित कर दिया किअब वह चुनौतियों से दो चार होने को तैयार हैं.अब कोई बेड़ियाँ उसके पैरों में नहीं बाँधी जायेगी.महिलाओं को ओट से बहार निकलकर जिम्मेदारी संभालनी होगी.इस सम्बन्ध में याहू व गूगल की प्रथम महिला इंजीनियर ,सीईओ मेरिसा मेयर का कथन हैं कि-अगर मई महिला होने का लेकर ज्यादा सजग रही होती तब तो मैं दब ही जाती.अनेकानेक चुनौतियों का अम्बर सामने खड़ा हैं,उसमे प्राथमिकता टी करना हैं,साथ ही खुद को अच्छी तरह समझकर तर्कपूर्ण ढंग से अपना व्यवहारिक विश्लेष्ण करके तय करना होगा किआप जो जीवन चाहती हैं,उसके साथ निष्पक्षता व ईमानदारी से प्रयत्न प्रारम्भ करना होगा.ईलिम्श्मीर रूजवेल्ट ,अमरीका का कहना हैं कि औरो की गलतियों से सिखों.आपका जीवन इतना लम्बा नहीं हो सकता किपहले साड़ी गलतियों को खुद करे,फिर सीखें.
                  हमारे आस-पास रंगबिरंगी दुनियां हैं,जिसमें हरा रंग जिन्दगी का प्रतीक हैं.कमान संभालकर लीडर का दायित्व निर्वाह करे क्योंकि एक लीडर की जिजीविषा ही उसे आगे बदाति हेह,क्योंकि स्त्री को विकट परिस्थितियों से जूझना और किसी भी तरह से आता हैं.अपनी वास्तविक जगह हासिल करके आत्मसम्मान के साथ जिए और खुश होकर आस-पास के माहौल को भी खुनुमा बनाएं.लेकिन संतोष भरी जिन्दगी व्यतीत करने के लिए हमे अपने आपको साबित करना होगा.अंदर छिपे गुणों को निखारना होगा.यह बिलकुल वैसा ही जरूरी हैं जैसे खुद को रहने के लिए खुद को पहले मुस्कराना होगा.महिलाओं को सम्बल बनाने के लिए सर्वप्रथम उसके अंदर आत्मविश्वास जगाना होगा जो उसे बचपन से ही भरे    ,उसके दिमाग में विचार उसे कमजोर बनाते हैं.उसके अरमान पिंजरे में कैद होकर रह जाते हैं,सपनों की उड़ान भरना भूल जाती हैं,पराश्रिता उसका गुण बन जाता हैं,स्वयं निर्णय लेने में अक्षम हो जाती हैं,जिससे गुजरते समय के साथ उसमे आत्मसम्मान की कमी आने लगती हैं.अनजाना सा दुःख उसके दिल को कचोटता रहता हैं.यह अनिर्णय की नींव में पारम्परिक सोच पनपने ल्ज्ती हैं.इससे उबरने के लिए उसे स्वयम अपना लीडर बनना पड़ेगा जिससे हर समस्या का समाधान देने में सक्षम बनेगी,आत्मविश्वास जागेगा.नई दिशा और प्रेरणा मिलेगी.जब कामयाबी मिलेगी तो खुद पर नाज होगा.प्रत्येक महिला को किसी भी परिस्थिति का जिम्मेदार दूसरे पर न डालकर स्वयम उसके निराकरण के लिए जुट जाना चाहिए.चाहे कैसी भी दिक्कत आयें ,मैं उसका हल खुद ही ढूढने की पूरी कोशिस करूंगी.वैयक्तित्व निष्पक्षता के साथ मुकाबला करूंगी.किसी भी परिस्थिति में अपने आपको कमजोर नहीं पड़ने दूंगी ,न ही अपने को योग्य समझूँगी,क्योंकि जब महिला अपनी शक्ति व क्षमताओं पर पूर्णयता विशवास करेगी तभी लोग आपका समर्थन करेगे.भयरहित,संदेहहीन विचार को भिःमिय्त दे.पर अंतिम निर्णय अपने स्वविवेक ,तर्कपूर्निता व अपनी आवश्यकता के आधार पर करे.ऐसा होने पर आप दूसरों को भी राय दे सकेगी.आत्मविश्वास के साथ-साथ आत्मसम्मान भी बड़ेगा.आध्यात्मिक उन्नति के लिए थोडा स्वयम के लिए समय निकाले.हरफनमौला साबित हो.लीडरशिप का मतलब एक ऐसा करिश्माई व्यक्तित्व का स्वामी होना,जिस पर गर्व महसूस कर गौरवान्वित हो.बैंगनी रंग रहस्य का प्रतीक होता हैं.रहस्य छुपाने का हुनर प्रत्येक लीडर  का एक विशेष गुण हैं.स्त्रियों का तो यह जन्मजात गुण हैं कि वह किसी भी रहस्य को छिपाकर रख सकती हैं.वह इस हुनर में पारंगत हैं.घरेलू माहौल में मिलने वाली आलोचना,छीटाकशी से महिला का ध्यान भंग होता हैं.ऐसे में उसे चाहिए किवह आलोचना में से अपने हित के शब्दों को समाहित करे,बाकी की उपेक्षा करे.स्पष्ट शब्दों में अपना विरोध दर्शायें.खुद की निगाह में कमतर महसूस न होने दे.व्यक्तित्व को कमजोर न पड़ने दे.हौसला के साथ अपने वादे को निभाएं.खुद को लगातार प्रगति की राह पर चलने में पीछें न हटे.समता वाला माहौल तैयार करे,बेटा-बेटी की मानसिकता की जद पर करारी प्रहार करे.इसके लिए अपने हुनर को तराशना होगा,उन अवसरों को पहचाने,जिसमे भेदभाव होता हैं.फायनेंसियल टाइम्स की दक्षिण एशिया प्रतिनिधि एमी कादिमन का कहना हैं कि स्त्रियाँ पड़ रही हैं,कम कर रही हैं,लेकिन मर्यादावादी सोच के साथ ही बड़े होने वाले भुत सारे पुरुष तो यही मानते हैं किउन्हें पत्नी और माँ ही रहना चाहिए.पहले घरेलू स्तर पर पुरुष की सोच व नजरिया बदलना जरूरी होगा.जामुनी रंग पूर्वाभास का प्रतिक होता हैं.महिलाओं में मुश्किलों से जूझने की क्षमता अद्भुत होती हैं.उनकी छठी इन्द्री तेज होती हैं,हर खतरे को पहले से ही भांप जाती हैं और यही पूर्वाभास उन्हें जूझने में मदद करता हैं.स्त्री सच का सामना करने से कभी नहीं घबराती हैं,वह सच का सामना करने के लिए लड़ने को तत्पर रहती हैं.नीला रंग सच्चाई का प्रतीक होता हैं और उसकी यही सच्चाई ताकत बनकर उसे कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत बनाएं रखती हैं.लीडरशिप हांसिल करने के लिए वह एक लक्ष्य का निर्धारित करती हैं और उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने में योग्यताओं को विकसित कर सक्षम बनती हैं और उस लक्ष्य प्राप्ति के लिए पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करने के लिए दृढ प्रतिज्ञ व वचनबद्ध रहती हैं.शैली,ब्लेयर,बैरिस्टर व समाजसेवी का कथन हैं किइस बात से निराश न हो कि आपकी राह सरल बनाने वाले पर्याप्त रोल मॉडल नहीं हैं.इसके बजे आप खुद ऐसा रोल मॉडल बनने की तमन्ना करे और फिर आप सफल हो जायेगी.हर काम करने वाले की एक तमन्ना होती हैं कि वह लीडरशिप के शिखर तक पहुचें.यह राह निष्कंटक नहीं हैं लेकिन महिलायें अपनी सक्षमता के बल पर इस राह को आसान बना लेती हैं,जहां आप काम करती हैं वहां आपका काम आपको सम्मान और पहचान दिलाता हैं.उस स्थान पर आपकी जगह निर्धारित हो जाती हैं.आत्मनिर्भर बनती हैं.चुनौतियों का सामना करते हुए कभी नहीं डगमगाती हैं क्योंकि उसका आत्मविश्वास उसे बताता हैं किआगे अवसर भी हैं,स्वयं को सुरक्षित महसूस करती हैं.कामगार जगह पर कई चुनौतियाँ महिलाओं के सामने खड़ी होती हैं जिनके जो सबसे महत्वपूर्ण हैं उसका ताल्लुक केवल और केवल छवि से हैं.इस बारे में हिलेरी क्लिंटन के एक प्रेस सहयोगी के कथन से जाना जा सकता हैं कि महिला लीडर क्या कह रही हैं या वो क्या कहेगी,से कही ज्यादा लोग इस बारे में बात करते हैं किवो कहते वक्त कैसी दिख रही थी?महिलाओं की बनावट रंग ढंग वेशभूषा सब एक माएक्रोस्कोप में रखी स्लाइड की तरह निरीक्षण किया जाता हैं अगर महिलाओं में लीडर शिप की चाह हैं तो एक लक्ष्य अवश्य होगा,लक्ष्य जरूरी हैं.अगर मंजिल ही नहीं होगी तो सफर बेमकसद हो जाता हैं.मंजिल होगी तो उत्साह भी बरकरार रहेगा.जब उत्साह भरा कार्य किया जाय तो उपलब्धी का अहसास भी प्राप्त होगा.पपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए हमे झिझकना नहीं चाहिए बल्कि आक्रामक रुख अपनाना चाहिए.छीटा कशी ,अब्मान्ना और अन्याय का विरोध करना सीखें.आपने किसी भी परिस्थिति में कड़े से कड़े फैसले लेना होगा तभी आपकी पहचान तक होगी.आपकी लीडरशिप में सबसे बड़ी बाधा हैं किआप महिला होने की दुहाई देकर अपने आपको कमजोर साबित नहीं करे.लोगो से सहयोग अवश्य ले,लेकिन आश्रित न बने.लेकिन जहां तक हो सके अपनी समस्याओं से स्वयं ही निपटे.हावर्ड,बिजनेस रिव्यू के  तेनी श्वार्ट्ज कहते हैं कि लीडरशिप के मामले में जब तुलनात्मक शोध हुए तो पता चला किमहिलाये लीडरशिप के एक स्तर पर कमजोर दिखाई देती हैं,वो हैं एग्रेशन (आक्रामकता) जहाँ अपने लक्ष्य की दिशा में पुरुष बेहद तेजतर्रार रवैया व गति से बदने में विशवास रखते हैं वही महिलाएं सुस्त दिखाई देती हैं.अग्रेष्ण एक लेतीं शब्द हैं जिसके मायने होते हैं-दूसरो से आगे कदम रखने का फैसला.हर इन्सान के अंदर एक लीडर छुपा होता हैं,बीएस उसका सामने का ढंग अलग होता हैं.जुडी गार्लेंड जो एक जमाने में अमेरिका में सबसे ज्यादा पारिश्रमिक पाने वाली महिला थी उनका वक्तव्य हैं कि किसी और का दूसरे दर्जे का संस्करण चाहिए.स्त्री तो बचपन से ही प्रतिवद्धता की कसौटी पर खरी उतरी हैं उसमें यह गुण रग-रग में रचा बसा हैं.नारंगी रंग की तरह प्रतिवद्धता का प्रतिक हैं जो लीडर बनने का सबसे बड़ी आवश्यकता होती हैं.एक्सपर्ट का विचार हैं किअलग-अलग व्यक्तित्व के आधार पर लीडरशिप स्टाइल होती हैं.सफलता की राह पाने के लिए दिमाग में भविष्य की स्पष्ट तस्वीर होनी चाहिए,विचार होना चाहिए.उद्यमी बनने के लिए हमें विचार या योजना को अमलीजामा पहनाना चाहिए और उसके लक्ष्य ,उसके लाभों पर फोकस करना चाहिए.एक दिवस पर अच्छे से काम करने के लिए  रणनीति बनना चाहिए.अर्थात प्रत्येक क्षेत्र में सफल होने की काबलियत होनी चाहिए,सीमित संसाधनों के रहते उस रास्ते को चुनना जिसमें बेहतर परिणाम निकल सके.दिशा निर्देशक बनकर काम को सही अंजाम देना चाहिए.मोनिटरिंग अच्छी होनी चाहिए और टीम के लिए काम निर्धारित करना  समय पर काम पूरा कराने के लिए काबलियत  होना चाहिए.लीडरशिप को प्रेरक बनना चाहिए.लोगो को ऊर्जा से भरना और लक्ष्य पाने के लिए प्रेरित करना चाहिए.उपलब्धिमिलने पर सम्मानित करना चाहिए एक शेपर्ड की तरह.अगर काम बिगड़ जाए तो उसमे सही और गलत को पहचानने का हुनर होना चाहिए.साथ ही टीम को नये सिरे से लक्ष्य पाने के लिए प्रेरित करना चाहिए,जिससे वे एकजुट होकर लक्ष्य प्राप्त कर सके.ब्रिजविल्डर्स की तरह नये विजन और मिशन के साथ तुरंत लक्ष्य प्राप्ति में जुट जाना चाहिए.

                 महिलाएं आतंक के सायें से निकल रही हैं महिला सश्क्तिक्र्ण का अलख जगा रही हैं.अलगाववाद और आतंकी गतिविधियों के बीच अमन और चैन का पाठपड़ा रही हैं.हर महिला कुछ न कुछ करना चाहती हैं,वह आत्म निर्भर बनने का संकल्प ले रही हैं,स्वयं कमाकर स्वयं पर खर्च करके आजादी चुनना चाहती हैं.वह एक अलग प्रकार का आत्मविश्वास पैदा कर रही हैं.वह अपने जीवन का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं.महिलाओं की लीडरशिप के अध्धयन से प्राप्त हुआ हैं कि महिलाएं लीडरशिप में पुरुषों को मात देती हैं.महिलाओं में पुरुषों से कही ज्यादा समस्याओं को सुलझाने की पारदर्शिता और सहानुभूति होती हैं.शोध में यह भी पाया गया किमहिलाओं में पुरुषों से ज्यादा क्रियटिव थिंकिंग होती हैं.महिला लीडर्स में रिलेशनशिप बिल्डिंग स्किल्स गजब की होती हैं.महिलाओं में एक एंटरप्रन्योर ,रिस्की नेगोशिएटर वाले गुण होते हैं.अब महिला लीडर्स आगे बड़नेके लिए गैर पारम्परिक रास्तों को अपना रही हैं.अपने करियर के रास्ते में आने वाले उतर-चदाव से नहीं घबराती ,वरन उस पल को आनन्द से जीती हैं,महिलाओं को सफल लीडरशिप के कारण संस्थान मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनते जा रहे हैं.इससे महिला लीडर्स को भी अपने केरियर की राह को मजबूत करने का मौक़ा मिल रहा हैं.                                                  जारी हैं.....................................
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