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बुधवार, 27 सितंबर 2017

 राजनीति-  नारी महिमा      
                महिलाओं ने राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई हैं.मेवात जिले की पार्षद मोहम्मद बेगम गाँव की पहली ग्रेजुएट महिला बनी ,जिस गाँव में लडकों को भी नहीं पढायाजाता था.सैट भाईयों की बहिनों में सबसे बड़ी २६ वर्षीया गुड्डी धौलपुर की सरमथुरा ग्राम की सरपंच बनी.१२वी पास गुड्डी ने जीत जाने की ठानी और जीती भी.झुंझुनू जिले की विसनपुरा ग्राम की सरपंच बनी डॉक्टर मीनाक्षी डेंटिस्ट का कहना हैं कि’डॉक्टर और राजनीति दोनों ही समाजसेवा हैं.गाँव के हक में फैसलें लेगी और पंचायत को स्मार्ट विलेज बनाऊँगी.चार बच्चों की माँ जोधपुर से निर्विरोध चुनी गई संजू सोलंकी का कहना हैं कि’ऐसी योजना बनाई जाये जिससे जरूरत मंद महिलाओं को पैसा और ज्ञान दोनों ही मिल सके.ताकि कोई और कभी किसी लड़की के जन्म लेने या उसके माँ नहीं बनने पर उसके लिए चुनौतियाँ खड़ी नहीं कर पाए.’उनका कहना था कि ‘चुनाव लड़ना आसान था,बाकी सब संघर्ष भरा.’ तीसरे आम चुनाव में जयपुर की सीट पर जीत हासिल कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाली व पनीली आंखों की अप्रतिम सौन्दर्य सम्राज्ञी जयपुर की महारानी गायत्री देवी ने शिफान साडी और मोती को क्लासिकल ड्रेसिंग का दर्जा दिया.यु ऍन कमीशन ऑन स्टेट्स ऑफ़ वीमेन में लगातार पांच साल भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली दिल्ली की भूतपूर्व मुख्य मंत्री शीला दीक्षित को जुलाई २००८ में जर्नलिस्ट एशोसियेशन ऑफ़ इंडिया ने देश की चीफ मिनिस्टर का खिताब जीता.
                    होलेकदमों से मंत्री पड़ की शपथ लेने वाली अगाथा संगमा,केन्द्रीय मंत्री युवा शक्ति हैं.पर्यावरण के प्रति सजग अगाथा मेधालय के ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रही हैं.अंग्रेजी –हिंदी में बराबर पकड़ व युद्ध रिपोर्टर में महारत एग्रेसिव एंकर वरखा दत्त,एनडी टी व्ही ,ग्रुप एडीटर आज कलम पकड़ने वाली हर तीसरी लड़की की प्रेरणा हैं.कारगिल युद्ध से शुरू जज्बे के सफर ने मुम्बई के हमलों में हर आँख को रूला दिया.पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी बनाकर महिला सशक्तिकरण के साथ पुरुष क्षेत्र में अपना आधिपत्य स्थापित करने वाली महबूबा मुफ़्ती ,राजनीतिज्ञ ने कश्मीर जैसे बाहुल्य मुस्लिम क्षेत्र में हिजाब छोड़कर,स्कार्फ बाँधने का ट्रेंड शुरू किया.रामानुज फैलोशिप प्राप्त व घुड़सवारी की शौकीन ३१ वर्षीया छवि राजावत सरपंच,ग्राम पंचायत सोडा,राजस्थान बनी,इनके विषय में कहना हैं किएक महिला सरपंच घूँघट में अंगूठा छाप नहीं हैं बल्कि अंग्रेजी जान्ने वाली,नरेगा की बैठकों में गॉंव की हालात पर बूलती हैं तो अच्छे-अच्छों की छुट्टी कर देती हैं.
                       आजादी के बाद देश के किसी राज्य की पहली महिला वित्तमंत्री अकाली दल की डॉक्टर उपिन्दर जीत कौर बनी.डॉक्टर कौर ने दूसरे राज्यों में कम्पनियों के पलायन को रोकने के लिए भी प्रयास किया.स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी व कवियत्री सरोजनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कौंग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थी.साथ ही उत्तरप्रदेश की प्रथम राज्यपाल बनने वाली प्रथम महिला थी.अन्याय व असमानता के खिलाफ लड़ाई लदी,असहयोग आन्दोलन में हिस्सा लिया.अनूठे जीवन की मालिक कमला देवी चट्टोपाध्याय ‘नमक सत्याग्रही’के तौर पर जेल गई.आजादी पश्चात हैंडलूम उद्द्योग की लोकप्रिय बनाने के लिए ग्राम कलाकारों का साथ दिया.नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिन्द फ़ौज की पहली महिला कमांडर केप्टन लक्ष्मी सहगल के हाथों रानी झाँसी रेंजिमेंट की कमान थी.भारत छोडो आन्दोलन में भाग लेने वाली व अहम भूमिका निभाने वाली उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री व देश की प्रथम महिला मुख्य मंत्री सं १९६३ में होने का गौरव सुचेता क्रपलानीजी को हैं.




आर्थिक –
  दुनियां की आधी आबादी को उनके मनोबल को ऊंचा करने के लिए और आर्थिक निर्भर बनाने के लिए कुछ जीवटमहिलाओं के द्वारा संगठन स्थापित किये गये जिसके बलबूते शोषित महिलाओं का उत्थान करने में जुटी हुई हैं.आर्थिक स्वावलम्बी नारी ने घर की चाहरदीवारी से निकली लेकिन वह दोहरा व्यक्तित्व जीने लगी.सामाजिक बन्धनों,बेड़ियों के कारण उसका व्यक्तित्व खुलकर विकसित नहीं हो पाया हैं.वह कुंए से निकलकर खाई में गिरने जैसी हो गई हैं.पटना की आठ महिलाओं ने ऑटो रिक्शा चलाकर साबित कर दिया किसिर्फ रोजगार का एक नया जरिया अपनाना नहीं था,बल्कि अपने लिए खींची गई लक्ष्मण रेखा के दायरे को थोड़ा आगे बड़ाया.हमेशा पुरुषों का क्षेत्र रहा महिलाओं ने अपने मजबूत इरादों के साथ इसतरह के काम करने को स्वीकार किया हैं बल्कि इस क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का दामोंदार भी अपने कंधे पर लिया हैं.सं १९८९ में यूनाईटेड नेशंस एन्वायरमेंट प्रोग्राम में ग्लोबल ५०० रोल ऑफ़ ऑनर पुरूस्कार प्राप्त व गोलपाड़ा जिले की देश की पहली महावत पार्वती बरुआ को ‘हाथियों की रानी’भी कहा जाता हैं.३५ लाख से अधिक पौधे ८० वर्षीया इला भट की प्रेरणा से लगाये गये और इनकी प्रेरणा से ही सं १९७० के दशक से बोझा ठोने वाली महिलाओं का संगठन ‘सेवा’के नाम से बनाया.गुजरात की दलित महिलाओं के लिए रेह्साना जिलें में क्रषि समिति वन लक्ष्मी बनी.
                आर्थिक तौर पर स्वावलम्बी बनाने के उद्धेश्य से कमजोर वर्ग की महिलाओं को कम व्याज पर देने के लिए ‘भारतीय महिला बैंक’की स्थापना की.इस बैंक की चेयर पर्सन व मैनेजिंग डायरेक्टर ऊषा अनंत सुब्रमन्यम नियुक्त की गई.महाराष्ट्र की महिलाओं की सम्मान में देश का पहला महिला डाकघर स्थापित करने के उद्धेश्य ,महिलाये आसानी से अपना पोस्टल सम्बन्धी कार्य कर सके.इस डाकघर की सभी कर्मचारी महिलाएं हैं.गॉव की महिलाओं को स्वावलम्बी बनाकर आर्थिक रूप से निर्भर बनाने का लक्ष्य रखने वाली चेतना सिन्हा का कहना हैं कि ‘अगर आप असफल होते हैं तो लोगों को हतोत्साहित न करने दे बल्कि अपनी असफलता व काबलियत का एक कदम माने.आठ हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली हिसार के मंगाती मोहब्बत गॉव की सुमित्रा देवी का कहना हैं कि ‘महिलाओं को खुद अपने पैरों पर खड़ा होना जरूरी हैं.मजदूर परिवार की सुमित्रा देवी ने ‘जाग्रति महिला’का गठन किया.वर्तमान में आठ हजार का कारवां पार कर गया.मिशन हरियाली को आत्मसात कर प्रसारित करने में जुडी अमरता पटेल,चेयर पर्सन .ऍन डी डीबी व्यवसायिक महिला नहीं,बल्कि समस्याओं को सुलझाने की कड़ी का एक हिस्सा मात्र हैं.
              शीतल शांति लाइफ की संस्थापक शीतल मेहता वाल्श का मकसद गुजरात के गॉवों और गंदी बस्ती में रहने वाले गरीबों को कम ब्याज पर आर्थिक मदद देकर स्वालम्बी बनाया.असफल शादी,पीटीआई से परेशान तीस साल की पत्रिका नारायनन फूड चेन की मालिक बनी.रात में महिलाओं के लिए सुरक्षित सफर के लिए मुम्बई की रेवती राय ने ‘फॉर सी कैब’ शुरू की.सी टैक्सी नाम से सेवा केरल में शुरू की .इन टैक्सी की.आनर व ड्राईवर दोनों ही महिलाये ही हैं.विश्व भर में सहनशील व समर्पण की प्रतीक बना देने वाली संत व टेम्प लेटन और नोबेल शान्ति पुरुस्कार प्राप्त मदर टेरेसा ने कलकत्ता से दुनियां के हर सम्बेद्नशील के दिल में रास्ता बनाया.सफेद साडी पर नीली पट्टी वाली मदर टेरेसा मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी की प्रणेता भी थी.सुनीता नारायण का कहना हैं कि ‘समाज तभी तरक्की कर सकता हैं जब उस देश की महिलाएं सशक्त और सक्षम होने के साथ अपने हक के लिए जागरूक होकर अपनी लड़ाई लड़ेगी.लेकिन महिला सश्क्तिकरन की राह तभी खुलेगी,जब महिलाओं को घर की इज्जत समझने के बजाय,उन्हें घर का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य समझा जाए.जिस दिन ऐसा हो जाएगा,महिलाये खुद व खुद सशक्त हो जायेगी.मेघा पाटकर ,सामाजिक कार्यकर्ता का कथन हैं कि ‘महिलाओं में क्षमता हैं,जीवटता हैं लेकिन व्यवस्था ने उन्हें बंधक बनाकर रखा हैं.महिलाओं की भागीदारी के सम्बन्ध में मेधा जी का कहना हैं कि ‘व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए कानून बनवाने में,उन्हें लागू करवाने में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी.हमारे देश की ५०%महिलाओं को भुलाकर देश को मजबूत नहीं बनाया जा सकता.संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए महिलाओं को सशक्त होना जरूरी हैं.क्योकि महिलाएं ही जीवन की आधारभूत जरूरतों को सुरक्षित रखती हैं.महिलाओं का मूल्य पैसों से नहीं चुकाया नहीं जा सकता.समाज को मजबूती प्रदान करने में उनका अपना योगदान व नजरिया होता हैं.इसलिए महिलाओं के लिए अपने अधिकारों की समझ बडानी होगी.उसका प्रबोधन करना यानि किजागरूक करना और आगे बदना जरूरी हैं.महिलाओं को सशक्त बनाने और भागीदारी बनाने के लिए ऐसे नीति नियम बने,जो महिलाओं के अनुकूल हो,प्रोफेशनल लेबल पर भी चीजों में बदलाव लाना जरूरी हैं.उद्ध्मिता निर्माण क्षेत्र में उन्हें अपनी सशक्त मौजूदगी होगी.स्वयं के ईमानदार प्रयास और परिवार मिलकर ही परिस्थितियाँ बदली जा सकती हैं.                                     जारी हैं..................................






















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