मेडिकल – नारी महिमा.....
भारत में महिलाओं ने शिक्षित होकर
प्रत्येक क्षेत्र में अपनी अमित छाप छोड़ी.मेडिकल क्षेत्र भी उनसे अछूता नहीं
रहा.भारत देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदी जोशी बनी.डॉक्टर दादी के नाम से मशहूर
गाय्नोकोलोजिस्ट डाक्टर भक्ति यादव की उमंग के आगे उम्र के थपेड़े को भी बेअसर कर
दिया.डॉक्टर यादव इंदौर की प्रथम महिला एमबीबीएस हैं,जो सं १९४८ से महिलाओं का
मुफ्त इलाज कर रही थी.इस बेमिसाल सेवा के लिए पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया
गया.महाराष्ट्र की पहली महिला न्यूरोसर्जन डॉक्टर गीता पारूलेकर को कई बार
हॉस्पीटल में नर्स समझा.डॉक्टर गीता के अनुसार ‘एक महिला के लिए घर और काम के बीच
संतुलन बनाना आसान नहीं.अपने कम को चुनौती की तरह लो और मुस्कराते हुए अंजाम
दो.नागपुर में पैदा हुई जुलेखा ने सं १९६४ में कुवैत में अमेरिकन मिशन हॉस्पीटल
में काम किया.डॉक्टर रानी बंग,गाय्नोकोलोजिस्ट ने शिशु म्रत्यु दर घटाने के लिए
ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण दिया.इनके मॉडल को न केवल देशभर में अपनाया गया
बल्कि यूनिसेफ ने भी इसे अपनाया.
गॉव में जाकर गरीब और वंचितों को
स्वास्थ्य सेवा देना और उन्हें जागरूक करने वाली नागपुर में जन्मी जूलेखा दौउद को
यूएई को टॉप गाय्नोकोलोजिस्ट का अवार्ड व फ़ोर्ब्स की यूएई में टॉप १०० इंडियन
लीडर्स को लिस्ट में शामिल हैं.गीता रामानुजन,शिक्षाविद सीबीएसई का सिलेबस में
परम्परागत कथा –किस्सों के जरिये कोर्स पूरा करने की शैली अपना रही हैं.इनकी
पद्धति को कर्नाटक के ग्रामीण स्कूलों ,अजीज प्रेमजी यूनिवर्सिटीज ऑफ़ गोपनवर्ग ने
अपनाई.न्यूट्रीशियन मोनास्टर डिग्री होल्डर राजघराने में जन्मी डॉक्टर मृणालिनी
देवी पुआर ने कम लागत में पोषण युक्त आहार की ह्सिक्षा देने के लिए शांतादेवी
अस्पताल में एक ट्रेनिंग केंद्र शुरू करवाया.वे कहती हैं कि ‘महिलाएं शिक्षित
हो,बच्चों का करे बेहतर पालन-पोषण.’मिस वर्ल्ड टायल्स जीतने वाली पहली एशिया महिला
रीता फारिया पहली डॉक्टर हैं.अमेरिकन की प्रथम डॉक्टर एलिजावेथ ब्लैक वेळ ने
न्यूयार्क इन्फारमरी फॉर वुमन एंड चिल्ड्रेन की स्थापना की.
दक्षिण भारत की पहली टेस्ट
ट्यूब बेबी का ऑपरेशन करने का रिकार्ड डॉक्टर कमला सेल्वाराज के नाम
हैं.अगस्त,१९९० में किये ऑपरेशन से बच्ची का नाम उनके सम्मान में ‘कमला’रखा.मुम्बई
की जानी-मानी गायानोकोलोजिस्ट ऑर्गेनाइजेशनका वुमन ऑफ़ द ईयर अवार्ड डॉक्टर फिरोजा
पारिख,आईवीफ तकनीकि से जुड़वाँ लडकियों को जन्म देने से इनका नाम देश-विदेश में
जाना-पहचाना जाता हैं.अब तक पांच हजार से अधिक महिलाओं की कोख हरी करने वाली
डॉक्टर पारिख का मकसद निराश हो चुके ग्रामीण क्षेंत्रों की रहने वाले अभावग्रस्त
लोंगों तक यह सुविधा पहुँचना हैं.बैंगलूर में स्पेशियलिस्ट हॉस्पीटलचलाने वाली
डॉक्टर सीता भटेजा,गायानोकोलोजिस्ट ने गरीब बेसहारा बच्चों के लिए तीस साल पहले
चाईल्ड फाऊंडेशनबनाया.देश की सबसे बुजुर्ग ९६ साल की कार्डियालाजिस्ट डॉक्टर
एस.ए.पद्मावती और पद्मविभूषण से अलंकृत हैं.इन्ही के द्वारा देश का पहला हार्ट
फाऊंडेशन शुरू किया गया.
शोणित व अधिकार-
महिला अधिकारों की अलख जगाने
के काम को समर्पित देश की पहली प्रकाशन संस्था ‘काली’की सह संस्थापक उर्वर्शी
बुटालिया द्वारा वर्ष १९८४ में स्थापित एस संस्था का उद्धेश्य ‘दुनियां महिलाओं को
जिस नजरिये से देखती हैं,उसमें बदलाव लाना.यौन शोषण,मोलेस्टेशन,दहेज प्रथा जैसे
मुद्दों पर आवाज उठाना और जागरूकता फैलाने का कार्य ‘जुवान वुक्स’और ‘काली’ ने
मिलकर किया.साँसों पर पहरा व पूरी दुनियां घूँघट में सिमटी सरजू आधी दुनियां के एक
बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करती.तीनकमरों के कच्चे घर में १७ घंटे फिरकनी सी घूमती
आम औरत के दर्पण सी सरजू की दुनियां हैं.महिला उत्थान की नेत्री बेगम आबिदा
फखरूद्दीन अली अहमद ने अपने पतिसे अलग मुकाम तलाशने की कोशिस की.आठ साल तक बरेली
की संसद रही बेगम आबिदा के समाज कल्याण के प्रति उनके प्रयास अविस्मरनीय हैं.रेप
पीड़ितों का साक्षात्कार लेने वाली इफराह बटने उनकी मदद की.सं २०१३ में इफराहने
कुनन पोश्मोरा रेप केश की पिटिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.इफराह ने चार अन्य
महिलाओं के साथ डूयू रिमेम्बर कुनन पोशमोरा किताब लिके,जिसे जे एल एफ ने लांच
किया.छेड़छाड़ और यौन शोषण के खिलाफ लडकियों को जागरूक करने वाली दिल्ली में
पत्रकारिता की छात्रा स्मृति सिंघल ने फ्रीज मॉब मूवमेंट प्रारम्भ किया.इसमें
रास्ते में अचानक टीम के लोग किसी स्टेचू की तरह खंड हो जाते हैं.इनके कंधे पर एक
कागज चिपका होता हैं जिसमें महिलाओं की सुरक्षा से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियाँ और फोन
नम्वर होता हैं.
देशभर में ब्रेब गर्ल और नेशनल
हीरोइन के नाम से चर्चित २१ वर्षीया प्रद्न्या मन्धारेने लोकल ट्रेन में उनके साथ
हुई अभद्रता करने पर वह डरने की बजाय पिटा और बाल घसीटते हुए रेलवे पुलिस के पास
ले गई.खुद के साथ होने वाली अश्लील हरकतों के खिलाफ बेशर्मी मोर्चा उठाने वाली
मिशिका सिंह का कहना हैं कि ‘अगर आप बदलाव चाहते हैं तो खुद आपको ही शुरुआत करनी
होगी.चप्पल मारूंगी अभियान चलाने वाली अलीशा का मानना हैं कि ‘घटिया हरकतों और
छेड़छाड़ का सार्वजनिक और मुंह तोड़ जबाव देना चाहिए.’इस अभियान का उद्धेश्य हैं कि
सड़क छाप मजनुओं और आशिक मिजाजों को सबक सिखाना था.लडकियों और समाज के गुनहगारों
को जन्म देने वाली कोलकाता में जन्मी जस्मीन पथेजा का पुरूषों के प्रति नजरिया के
विषय में कहना हैं कि ‘बचपन से ही महिलाओं के प्रति बहुत से पुरुषों के नजरिये में
एक लिजलिजापन महसूस किया.’
प्रोजेक्ट गर्ल्स के नाम से
चर्चित चन्द्रशेखर ने सं २०१५ में १७ साल की उम्र में अमेरिका के १४ यूनीवर्सटीज
में आवेदन दिए इसमे आई.वी.लीग के सभी ८ कालेजों में नाम था.इनका स्कोर २४०० में
२३९० था.पूजा ने एस गर्ल्स प्रोजेक्ट लडकियों को जागरूक करने की मुहीम से
बनाया.पार्किन्सन की बीमारी का ९७%पता लगाने वाला इंसानी आवाज कस मोबैल एप
बनाया.वर्तमान में हार्वर्ड यूनीवर्सटीज से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कर रही
हैं.वीडियो गेम में गलत तरीके से पेश करने के खिलाफ अभियान छोड़ने वाली ३१ वर्षीया
अनीता सार्किसियनएक्टिविस्ट ने सं २०१२ में छेड़ा.जान से मारने व दुष्कर्म की
धमकियां मिलने के बावजूद वीडियो गेम और मीडिया में महिलाओं के बारे में दुनियां भर
में बोलना नहीं छोड़ा.पति हत्या के आरोपियों के खिलाफ लड़ने वाली सोनिया की १०० बार
पेशी हुई,हर बार कोर्ट गई.
महिला आन्दोलन की सक्षम नेत्री
,विख्यात पत्रकार व लेखिका मधु किश्वर ने महिलाओं को हक दिलाने के उल्लेखनीय
प्रयास अपनी पत्रिका ‘मानुषी’के जरिये किये.अपनी सशक्त लेखनी तथा साहस की बदौलत
उन्होंने खोखले पड़ चुके सामाजिक नियमों व संकुचित द्रष्टिकोणके खिलाफ जो आग बरसाई
उससे कई लोग झुलसे.शोषित महिलाओं की आवाज ‘मानुषी’बन गई.दलित महिलाओं के प्रति हो
रहे
अत्याचारों के खिलाफ कुमुद दावड़े ने
आवाज उठाई.राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था से जुडी कई महिला प्रतिनिधियों के
इस्तीफे की वजह यही अपमान व उत्पीडन हैं.महिला सशक्तिकरण के साथ दिव्यांग के लिए
कार्य करने वाली उद्दीप सोशल वेलफेअर सोसायटी की संस्थापक व ओस्टियोपोरोसिस की
शिकार २ फुट ५ इंच की ३१ वर्षीया भोपाल की पूनम श्रोती ने २०१४ में स्थापना की.वह
सामान्य व्यक्तियों की तरह ९ घंटे कम करती हैं.दूसरों की भलाई करने वाली पूनम
श्रोती का मनोबल सातवें आसमान पर हैं.
महिलाएं शिक्षित होकर न
केवल आत्मनिर्भर तो बनी ही ,साथ ही उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार,अन्याय और
अधिकारों के खिलाफ भी आवाज उठाई.केप्टन नीति बंसल सेना में महिला अफसरों को स्थायी
बटन न देने पर बेवाकी से रायदेती हैं कि ‘महिलाएं अपनी काबलियत के दम पर पुरुष
सेना में कदम रखती हैं.’ सेना में स्थायी कमीशन के लिए जंग छेदी बिंग कमांडर
अनुपमा व रूखसाना ने वर्ष २००७ में कोर्ट में याचना की.वर्ष २०१० में कोर्ट ने सभी
महिला अफसरों को स्थायी कमीशन का आदेश दिया.दोनों ने कोर्ट में सबसे पहले
लड़ाईलड़ी,औरों को हक दिला खुद सेना छोड़ी.दोनों का कहना था कि ‘उन्होंने सम्मान की
लड़ाई जीत ली और भविष्य में महिलाओं के लिए रास्ता खोल दिया.’बच्चों के अधिकारों और
उनके लिए शिक्षा का संघर्ष करने वाली सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता मलाला युसुफजई
ने लडकियों के लिए शिक्षा प्राप्ति को प्रेरित किया.उन्होंने दर्शाया किलडकियों और
लडकों के सुरक्षित जीवन की बिनियाद र्ख्न्र में शिक्षा जरूरी हैं.सं २००९ में
बीबीसी में ‘डायरी ऑफ़ ए पाकिस्तानी स्कूल गर्ल’के नाम से ब्लौग लिख कर शिक्षा के
लिए प्रेरित किया.जार्डन की रानी रैनियाने सिविल सोसायटी पुरूस्कार से सम्मानित
किया.तालिवान ने सर पर गोली मार देने पर मलाला डरीनही,उसकी जिद्द थी,स्कूल जाना
बंद नहीं करूंगी.अपने जैसी हर लड़की को शिक्षा मिले.
गणतन्त्र दिवस समारोह में मुख्य
अतिथि अमेरिका राष्ट्रपति ओबामा को गार्ड ऑफ़ ऑनर देने वाली बिंग कमांडर पूजा ठाकुर
विश्वभर में भारत की महिला शक्ति प्रतीक बनकर उभरी.पूजा ने स्थायी कमीशन के लिए
एयरफोर्स के खिलाफ आर्म्ड फ़ोर्स ट्रिव्यूनल में रिट दायर की.पद्मश्री से सम्मानित
पर्यावरणविद सुनीता ने कोल्डड्रिंक में पाए गये कीटनाशक के मुद्दे पर मल्टीनेशनल
कम्पनी को हिला दिया.ग्रीन पौलिटिक्सकी समर्थक व पर्यावरण केंद्र की निदेशक सुनीता
‘डाउन टू अर्थ’पत्रिका प्रकाशित करती हैं.सुनीता नारायण का मानना हैं कि ‘महिलाएं
पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक बनाने की जिम्मेदारी को सबसे बेहतर उठा सकती
हैं.’क्योंकि पर्यावरण में फैलती अशुद्धता और प्राक्रतिक दुर्दशा का सबसे ज्यादा
खामियाजा महिलाओं,बच्चों और गरीवोंको उठाना पड़ता हैं.जाती या वर्ग के आधार पर
आरक्षण ही नहीं बल्कि महिलाओं की सत्ता में भागीदारी के लिए आरक्षण की सिफारिश
करने वाली नजमा हेपतुल्ला,उपसभापति,राज्यसभा का कथन हैं कि ‘आरक्षण से योग्य
महिलाएं घर से संसद तक के प्रति जागरूक रहेगी तथा व्यवस्था और सत्ता में भागीदारी
बड़ेगी.’यह भी सत्य हैं कि केवल आरक्षण से ही सुधार नहीं होगा बल्कि इसके लिए पुरुष
समाज को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराकर नजरिया बदलना होगा.एनआरआईपीड़ित युतियों के
मुफ्त केस लड़ने वाली दलजीत ने साबित कर दिया कि वह विधिक ज्ञान विजय का अचूक
अस्त्र हैं. जारी हैं..............................