Gallery

ब्लॉग आर्काइव

Blogger द्वारा संचालित.

Travel

Technology

बुधवार, 20 सितंबर 2017

उपलब्धियां-नारी महिमा.......................
          प्रत्येक देश की प्रगति में केवल पुरुषों का ही नहीं योगदान नहीं रहता हैं बल्कि महिलाओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता हैं ,फिर भी चाहे देश की आजादी की हो क्यों न हो?उनके कुछ कर दिखने का जज्बा वर्तमान में साफ दिखाई देता हैं.उनहोंने अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया हैं.अब वह ड्राईंग हाल में सजाने वाला गुलदस्ता नहीं रही,बंद पिंजरे से उडकर घर की पारम्परिक रुदियों की चोखट को लांघ कर अपनी ताकत दुनियां के सामने लाई हैं.
            जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पुरुष का वर्चस्व तोडकर अपनी योग्यता को सिद्ध कर दिया हैं किवे पुरुष पर भी भरी पड़ सकती हैं.पुरुष श्रेष्ठता के दावे को मिथ्या साबित करने वाली महिलाएं पुरुषों को पछाड़ने का दम रखती हैं.पुरुषों से शक्ति चाहे कम हो ,लेकिन महिलाओं में स्टेमिना उनसे ज्यादा होती हैं,भले ही पुरुष अपनी अहमवादी पृवत्ति के कारण इस सत्यता को मानने से इनकार कर दे लेकिन वह इस सत्य को अधिक समय तक दबा क्र नहीं रख सकता हैं.इस बात को सत्य किया हैं सं १९७३ में महिला विम्बल्डन विली ने पुरुष विम्बल्डन को धूल चटाकर अपनी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया और बैटल ऑफ़ सिक्सेस के नाम से प्रसिद्द हुई.खेल जगत में पुरुष शारीरिक सुद्र्द्ता के कारण महिलाओं का वर्चस्व कम जरूर रहा हैं.महिलाओं द्वारा हासिल किये गये कीर्तिमानों से वह पुरुषों से पीछें क्यों रह जाती हैं?शायद यह अंतर शारीरिक बनावट के कारण हैं.इसका अर्थ यह नहीं है किसभी जगह पुरुष सर्वश्रेष्ठ हैं.इस भ्रम को तोडकर अब वह बाजी मारकर सभी खेलों में अग्रसर होकर अपना लोहा मनवा रही हैं.एलियं स्त्रोक्र,महिला तैराक ने २७ बार ईंग्लिश चैनल पार करके कीर्तिमान स्थापित कर अपनी श्रेष्ठता साबित की हैं.विकलांगता को परे कर तमिलनाडू महिला क्रिकेट टीम की कम उम्र की राष्ट्रीय स्तर का तैराक व मेधावी छात्रा प्रीती निवासं द्वारा संचालित सोल फ्री दिव्यान्गों की हर संभव मदद करती हैं.लकवाग्रस्त प्रीती का कहना हैं किअपने पॉजिटिव सोच से हर कठिनाईयों से लदकर जीना सीख सकते हैं.पद्मश्री और अर्जुन पुरूस्कार प्राप्त व पैराप्लेजिक स्पोर्ट्स में राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ४२५ मेडल विजेट बैगलूर की डॉक्टर मालथी के.ढोल का कहना हैं किकमजोर,लाचार या मजबूर म्हिल्स समझने की भूल करने वालो को मात देने का प्रेरक उदाहरण बने.दिव्यान्गों के लिए समर्पित चैरिटीबल ट्रस्ट मातृ फाउंडेशन,बैंगलूर की संस्थापक और चेयर पर्सनहैं.२५ वर्षीया भक्ति शर्मा ने १० जनवरी,२०१५ को अन्टार्कटिका में २.१५कि.मी.तक तैरते हुए नया रिकार्ड बनाया.ऐसा एडवेंचर करने वाली दुनियां की पहली महिला बनी.१ डिग्री सेल्सियस के पानी में ५२ मिनट में दूरी तय की.स्कूबा डायविंग करने वाली अर्चना सदाना देश की एकमात्र बेस जम्पर हैं.१०० बच्चियों को स्कूबा दाय्बिंग सिखाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की बचनबद्ध हैं.सानिया मिर्जा राजिव गाँधी खेल रत्न से पुरुस्क्रत ने देश को गौरान्वित किया.२९ वर्षीया गीता टंडन जानीमानी स्टंट वुमन हैं.वेट लिफ्टिंग में चार बार चैम्पियन रह चुकी २० वर्षीया हरियाणा की कविता दलाल ने रेसलिंग की.निश्चय पर अडिग रही भारत की पहली महिला फाइटर ह्र्शिनी कान्हेकर ,३४ वर्षीया को दमकल भाग में नियुक्त हुई.सूमों रिंग से भी छोटे कमरे में रहकर बनी देश की पहली सूमो हेतल सूमो रेसलर बनी.द्रष्टि हीनता को शह और मात देने व छ:बार चेस चिम्पिया रह चुकी वैशाली सावकार ने अपने जीवन में फैले अन्धकार को हावी नहीं होने दिया.चिश को सोशल कालिंग कार्ड मनाने वाली वैशाली द्रष्टि हीनता को कभी अभिशाप नहीं मानती.वह बोलती हैं किमैं जीतती हूँ तो खबर एजी की तरह फैलती हैं.पहली पोजीशन पर आने की जिद करने वाली मीरा नायर चाहे स्पोर्ट्स हो या डिबेट या दूसरा काम॒॒पटीशन ,जिद बन चुकी थी.लीडरशिप क्वालिटी के कारण डीयूमें स्टूडेंट यूनियन की प्रेसिडेंट चुनी गई.पहाड़ों पर ट्रेकिंग करती ,इंडियन ,वेस्टर्न ,क्लासिकल म्यूजिक में पारंगत हैं.राज्यस्तरीय किसी भी फेड के बगैर अपने दम पर एशियन प्रतियोगताओं में २१ वेशीया मेघानारायं ने पदक तालिका में १०२ स्वर्ण ,२८ रजत,१९ कांस्य पदक जीते.८००-१५०० मित्र मध्यदूरी में दौड़ने पी.टी.उषा के बाद भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाली २९ वर्षीया ईस्टर्न रेलवे की ज्योतिर्मयी सिकन्दर ने भारत को गौरव दिलाया.बैंकाक में सम्पन्न एशियाड खेलो में भाग लेने वाली सबसे कम उम्र की खिलाडी शिखा टंडन को स्वीमिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया की ओर से बेस्ट एवर परफार्मरके लिए नवाजा गया.दो बच्चों की माँ अंशु ने पांच दिन में दूसरी बार एवरेस्ट फट कर बता दिया कि उनके हौसलें दुनियां के ऊंचे शिखर से भी ऊंचें हैं.६ साल में पांच बार एवरेस्ट पर चड़ने वाली भारतीय महिला भी हैं.जिनीयर वर्ग में राज्य स्तर पर चार स्वर्ण पदक जीतने वाली चित्रा परसनिसमहाराष्ट्र में शीर्ष वर्ग में स्थान रखती हैं.तैराकी में राष्ट्रीय चैम्पियन निशा मिलेट विभिन्न प्रतियोगिताओं में सौ स्वर्ण पदक जित चुकी हैं.पूर्व प्रधान मंत्री आई.के.गुजराल ने निशा को इंडियन ओलम्पिक ट्राफी बेस्ट स्पोर्ट्स वुमन ऑफ़ गेम्ससे सम्मानित किया हैं.घर से १२०किमी.दूर रोज सुबह सादे तीन बजे अभ्यास करने वाली पहली भारतीय पी.वी.सिन्धु बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियन में सिग्लस का मेडल जीता.विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्कैवेश खिलाड़ियों में चौदहवे पायदान में अपनी जगह बनाने वाली व युवा स्टाइल आईकान हिने के लिए जानी वाली दीपिका का कथन हैं कि जीतने का थिदा दवाब का अहसास स्वाभाविक हैं लेकिन यही आशाएं मेरी ताकत हैं और मुझे बेहतर प्रदर्शन करने को प्रेरित करती हैं.३० वर्षीया बीबी बुलबुल देश की पहली पहलवान हैं,जो WWW स्टाइल में रिंग में उतरती हैं.खली की शिष्या रियल स्टेट बिजनेस भी चलाती हैं.साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली बुलबुल के साथ पहली रेसलर कविता भी हैं.महिलाओं की सशक्तता के विषय में कथक नर्त्यान्गना का कथन हैं किसश्क्तिक्र्ण दो तरह के होते हैं,बाहरी व आंतरिक.बाहरीसश्क्तिकरण का अर्थ हैं-मौक़ा मिलना,जो मिल रहे हैं.और आंतरिक सशक्तिकरण का अर्थ हैं-इच्छा शक्ति का धनी होना. अंदर से मजबूत होकर ,बाधाओं से लडकरअपनी मंजिल पर कर सकती हैं.महिलाओं को अपनी विल पॉवर कैसे बडाना हैं,तय करना हैं.अपनी इसी मजबूत इच्छा शक्ति और सिद्धांतों के साथ सही रास्ते का चुनाव करते हुए आगे बड़नाहोगा.संतोष यादव,पर्वतारोही का मानना हैं कि अगर महिलाओं को मजबूत बनाना हैं तो हमें अपनी संस्क्रती को साथ लेकर चलना होगा.महिलाओं को असंतुलन की स्थिति से बहार निकलना होगा.एक बैलेंस बनाकर चलकर मन को इसी सोच को जगह देनी होगी किहर आदमी बुरा नहीं होता.लेकिन यह सारा कुछ मानसिक तौर पर मजबूत होने से ही होगा.सक्षम महिलाओं को दबी-कुचली महिलाओं को शिक्षित कर,उन्हें अपनी पहचान करानी होगी.विशवास दिलाना होगा कि स्वयं के भरोसे से ही आगे बड़ा जा सकता हैं.साथ ही सफलता प्राप्त महिलाओं को दूसरी महिलाओं को यह बताने की जरूरत हैं किअभी देर नहीं हुई हैं,उठो ,बाधाओं से लड़ों,सही रास्ते का चुनाव करो,पहल करो और आगे बड़ों.स्वयं के ईमानदार प्यास और परिवार मिलकर ही परिस्थितियाँ बदली जा सकती हैं.महिला,जो एक माँ हैं.जो सिरजन करटी हैं, घर परिवार चलाती हैं,उसका सशक्त होना जरूरी हैं.बेहतर घर प्रबन्धन के लिए महिलाओं को मालूम होता हैं कि उन्हें अपनी शक्ति का किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता हैं.इसका साक्षात् उदाहरण जर्मनी की ८६ वर्षीय जोहाना हैं जिन्होनें पेरेल्र वार पर जिम्नास्टिक करके विश्व रिकॉर्ड बनाया.

                                                 जारी हैं.................
NEXT ARTICLE Next Post
PREVIOUS ARTICLE Previous Post
NEXT ARTICLE Next Post
PREVIOUS ARTICLE Previous Post
 

Sports

Delivered by FeedBurner