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गुरुवार, 14 सितंबर 2017

एक धन्यबाद !!!!

जब से जीवन को समझना सीखा ,तब से अपने हिसाब से अलग दुनियां देखी.हर सुबह एक नई कोशिश के साथ शुरुआत करनी होती .हर जगह अपनी आप को सभी के जैसा साबित करना पड़ता.कभी ह्तोत्साह्त भरे तीखे मन को निराशा से भर देने वाले व्यंग वाण व् कटाक्ष शब्द ,तो कभी आगे बदने वाले उत्साह भरे बोल.लेकिन एन सब उतार-चडाब के बीच अपनी एक छोटी सी पहचान बनाने में कामयाब हुई .लेकिन इन सब के लिए मैं धन्यबाद तहे दिल से मार्गदर्शकों को देना चाहूंगी.मार्दर्शक शब्द जहन में आते ही मेरा मस्तक ,मेरे जीवन को प्रेंरना देने वालों के लिए नतमस्तक हो जाता हैं.सर्बप्रथम तो मेरे माता-पिता व् परिवार के समस्त जन ,जिन्होनें रास्ते में आने वाले मुश्किलों के पत्थरों को मील का पतथर बनाया.वो सब मुझें सीखनें के लिए तत्पर रहते.कभी मुश्किल हालातों के रहते आना-कानी करती,उनके बार-बार मोटीवेट करने पर मैं तैयार हो जाती.सहपाठियों को भी नजर अंदाज नही किया जा सकता .हर पल कितनी भी असहज परिस्थितियाँ रही हो,लेकिन उन्होंने अपने पीछे कभी भी नही रहने दिया.किसी भी विषय पर इचछा जाननें पर तुरंत एक से एक चींजे सीखने के लिए सामने रख दी.कभी भी हतोत्साहित नहीं करते .सर्विस लाइफ में स्टाफ के साथ स्टूडेंट्स के प्यार और सहयोग से नौकरी के बीस वर्ष बीत गए ,पता ही नहीं चला .मेरी शारीरिक कमजोरी का किसी ने मजाक नहीं बनाया .जब कभी किसी ने कुछ आक्षेप भी करना चाहा तो चाहने वालो ने खैर खबर ले ली. यह जीवन हैं जिसमें ऐसा नहीं हैं की केवल अज्ञानी ही किसी का मजाक बनाते है बल्कि पढ़े लिखे भी ऐसा कुछ कह जाते हैं जो उनकी योग्यता पर ऊँगली उठाता हैं किऐसा मेरे साथ कई बार हुआ ,काफी बुरा भी लगता था लेकिन मैंने अपनी कार्य क्षमता से ऊँगली उठाने वालों का मुंह बंद कर दिया .साथ वालो से ,बच्चों से हर पल कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता .अवहेलना मुझे और इरादों को मजबूत बनाती .कुछ पल की उदासी के बाद ,मैं एक नए उत्साह के साथ कुछ नया करने में लग जाती.जीवन की उपलब्धियों में सबसे बड़ा योगदान इन सभी का हैं ,वही मेरी निर्देशिका मैडम का कुछ कम नही हैं.उन्होंने पारस पतथर बन मुझे एक नई पहचान दी .एक समय था जब थिसीस सबमिट होने में,साक्षात्कार में हताश होने पर वह सरस्वती बन कर मेरा मार्गदर्शन किया.फलतः मैं कामयाब हुई और मुझे एक ऐसी पहचान मिली ,जिसने मेरी शारीरिक कमजोरी की पीछे कर दिया .आज यदि यह सब मार्ग दर्शक न मिले होते तो मैं आज जो हूँ ,वो न होती.मैं इन सभी के योगदानों का,महान मार्ग दर्शक ,महान प्रशिक्षण का एक ऐसा उत्पाद हूँ जिसकी कम बल्कि रास्ते के काँटों को हटाने वालो की प्रशंसा करते नही थकते.क्योकि साथ खड़े होने वाले की मिल जाते हैं लेकिन साथ चलने वाले कम ही मिलते हैं.रास्ता बताने वाले भी मिल जाते हैं.लेकिन मंजिल तक साथ चल कर समस्या निवारण वाले कम ही मिलते हैं.अधिकांशतः सभी के जीवन में मार्गदर्शक शब्द की बड़ी अहम भूमिका होती हैं इन्हें जीवन से अलग-थलग नहीं कर सकते .ये किसी के जीवन में किसी भी रूप में हो सकते हैं .मुझे ,मेरे मार्गदर्शको ने हर क्षण सीखने के लिए प्रेरित किया .कभी झिडकी देकर ,तो कभी प्यार से.मेरी काबिलियत से ज्यादा उन्होंने काबिलेदार बनाया.आज जो भी हूँ,उन्हीं की बदौलत हूँ.आज मैं उन्हें सत-सत नमन करती हूँ. 
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